बच्चों में मलेरिया के बढ़ते खतरे को लेकर डॉक्टरों की सलाह, बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की अपील

बरसात के मौसम की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से बच्चों में मलेरिया का खतरा अधिक होने के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि समय पर बचाव और शुरुआती पहचान से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया संक्रमित एनोफिलीज़ (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। यदि बच्चे को तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द, कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और उपचार कराना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं, घर में मच्छरदानी का उपयोग करें और खिड़कियों व दरवाजों पर जाली लगवाएं। इसके अलावा घर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि रुके हुए पानी में मच्छर तेजी से पनपते हैं। कूलर, गमलों, टंकियों और अन्य जल स्रोतों की नियमित सफाई करने की भी सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि वे स्वच्छता बनाए रखें और मच्छरों की रोकथाम के लिए स्थानीय प्रशासन के अभियानों में सहयोग करें। कई क्षेत्रों में फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और समय पर उपचार है। यदि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार शुरू किया जाए, तो अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए बरसात के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद आवश्यक है।

Related Articles

Back to top button