गुजरात में 28 दिन डिजिटल अरेस्ट रहा बुजुर्ग, सीबीआई-ईडी के नाम पर 1.47 करोड़ की ठगी

नई दिल्ली। गुजरात से साइबर धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है, जहां 72 वर्षीय एक व्यक्ति को हाल ही में 1.47 करोड़ रुपये की भारी राशि की ठगी का शिकार होना पड़ा। पीड़ित को लगभग 28 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” का सामना करना पड़ा। इसने जांच एजेंसियों के बीच व्यापक चिंता पैदा कर दी है।

गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा विंग ने इस बुजुर्ग पीड़ित के मामले का उल्लेख किया, जिसे धोखेबाजों ने पुलिस, सीबीआइ और ईडी जैसी विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में पेश किया।

साइबर विंग के अधिकारियों ने बताया कि वीडियो काल और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए धोखेबाजों ने “पीड़ित को गंभीर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए एक विस्तृत कहानी बनाई।”

धोखेबाजों ने दावा किया कि व्यक्ति के डिजिटल क्रेडेंशियल्स से समझौता किया गया है और उन्हें आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। दबाव बढ़ाने के लिए उन्होंने उसे ‘डिजिटल निगरानी’ या ‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत रखा, जिससे उसकी अन्य लोगों के साथ बातचीत सीमित हो गई और उसकी गतिविधियों की लगातार निगरानी की गई।”

“फंड सत्यापन” और “मामले के समापन” के बहाने धोखेबाजों ने व्यक्ति को कई लेनदेन से बड़ी राशि ट्रांसफर करने के लिए मनाया। यह मानते हुए कि वह अपने नाम को साफ करने के लिए आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है पीड़ित ने अंततः 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

इसके बाद ही उसे एहसास हुआ कि वह ठगा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर विंग ने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ पूरी तरह से फर्जी है।

Related Articles

Back to top button