भारत में बदलती लाइफस्टाइल से बढ़ीं बीमारियां, हाई बीपी-डायबिटीज ने पसारे पैर; संक्रामक रोगों में आई कमी

नई दिल्ली। देश में लोगों की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि संक्रामक रोगों के मामलों में कमी आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ताजा सर्वे के मुताबिक अब लगभग आधी आबादी हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, डायबिटीज और थायरॉयड जैसी समस्याओं से जूझ रही है, जो दस साल पहले 31 प्रतिशत थी।

साल 2025 में 25.6 प्रतिशत लोगों ने दिल से जुड़ी बीमारियों की शिकायत की, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा 16.7 प्रतिशत था। इसी तरह मेटाबॉलिक और एंडोक्राइन से जुड़ी बीमारियां भी 15 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत हो गई हैं। ये बीमारियां खासतौर पर 45 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जा रही हैं।

इसके विपरीत, बुखार, पीलिया और दस्त जैसी संक्रामक बीमारियों के मामले घटकर 15 प्रतिशत रह गए हैं, जो पहले 32 प्रतिशत थे। हालांकि 14 साल तक के बच्चों में अब भी आधे से ज्यादा बीमारियां संक्रमण से जुड़ी हैं।

बीमार पड़ने वालों की संख्या बढ़ी
सर्वे के अनुसार, पिछले 15 दिनों में बीमार होने वालों की संख्या भी बढ़ी है। 2025 में 13.1 प्रतिशत लोगों ने खुद को बीमार बताया, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत था। महिलाओं में बीमार पड़ने की दर पुरुषों से ज्यादा है। जहां 14.4 प्रतिशत महिलाओं ने बीमार होने की बात कही, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 11.8 प्रतिशत रहा।
उम्र बढ़ने के साथ बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। 60 साल से अधिक उम्र के 43.9 प्रतिशत लोगों ने हाल में बीमारी की शिकायत की, जबकि 45-59 उम्र वर्ग में यह आंकड़ा 22.5 प्रतिशत रहा।

इलाज महंगा, खर्च बढ़ा
अस्पताल में भर्ती होने की दर अभी भी सीमित है और हर 100 लोगों में करीब 2.9 लोग ही साल में अस्पताल जाते हैं। शहरी इलाकों में यह दर 3.2 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.7 प्रतिशत है। हालांकि इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने पर औसतन खर्च अब 34,064 रुपये हो गया है, जो 2017-18 में 20,135 रुपये था।

सकारात्मक बात यह है कि सरकारी स्वास्थ्य बीमा का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में 47 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 44 प्रतिशत लोग सरकारी बीमा के तहत कवर हैं। यह आंकड़ा 2017-18 में काफी कम था, जब ग्रामीण क्षेत्रों में 14 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 19 प्रतिशत लोग ही बीमा के दायरे में थे।

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