जिस फोन से द. कोरियाई राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के साथ ली फोटो, क्या है उसमें खास, जानिए कितनी है कीमत

नई दिल्ली. दुनिया की नजरें एक तस्वीर पर टिक गई हैं, लेकिन असली कहानी उस फोन की है जिससे यह तस्वीर ली गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और सैमसंग (Samsung) के चेयरमैन ली जे योंग की जो सेल्फी वायरल हो रही है, वह किसी आम स्मार्टफोन से नहीं बल्कि भारत में बने Galaxy Z Flip7 से ली गई है. यह सिर्फ एक फोटो नहीं बल्कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत का ग्लोबल शोकेस बन गई है.

सैमसंग ने खुद इस फोटो को शेयर करते बताया कि यह फोन उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित फैक्ट्री में बना है. यानी जो फोल्डेबल फोन दुनिया के सबसे एडवांस स्मार्टफोन्स में गिना जाता है, वह अब पूरी तरह भारत में तैयार हो रहा है. यही वजह है कि इस एक सेल्फी ने ‘नोएडा टू वर्ल्ड’ की कहानी को मजबूत कर दिया है.

सैमसंग ने इस बार Flip7 को सिर्फ डिजाइन अपग्रेड नहीं दिया, बल्कि इसे एक प्रीमियम टेक्नोलॉजी शोकेस बना दिया है. फोन की बाहरी स्क्रीन अब 4.1 इंच की हो गई है, जो किनारे से किनारे तक फैली हुई है. इससे बिना फोन खोले ही मैसेज, ऐप्स और टाइपिंग का अनुभव काफी बेहतर हो गया है. अंदर की स्क्रीन 6.9 इंच की है और 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आती है, जिससे स्मूथनेस काफी बेहतर हो जाती है. मजबूती के लिए इसमें टाइटेनियम फ्रेम दिया गया है, जो इसे हल्का और ज्यादा टिकाऊ बनाता है.
लाइव ट्रांसलेशन, एआई एडिटिंग
परफॉर्मेंस के लिए इसमें Exynos 2500 चिपसेट दिया गया है और साथ में Galaxy AI फीचर्स जोड़े गए हैं. लाइव ट्रांसलेशन, एआई फोटो एडिटिंग और नया FlexCam AI मोड इस फोन को बाकी फोल्डेबल से अलग बनाते हैं. कैमरा सेटअप में 50 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड कैमरा है, जबकि 4300mAh बैटरी इसे पूरे दिन चलाने के लिए काफी मानी जा रही है.
भारत में कीमत
भारत में इसकी शुरुआती कीमत करीब 1,09,999 रुपये रखी गई है, जबकि इसका सस्ता वर्जन Flip7 FE करीब 89,999 रुपये में उपलब्ध है, जिससे फोल्डेबल फोन को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है.
एक सेल्फी के पीछे छुपा बड़ा संदेश
यह पूरी घटना सिर्फ टेक्नोलॉजी लॉन्च नहीं है, बल्कि डिप्लोमेसी और बिजनेस का भी बड़ा संकेत है. इसी मौके पर भारत और दक्षिण कोरिया ने इंडिया-कोरिया डिजिटल भ की शुरुआत की है, जिसके तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर और एआई जैसे सेक्टर में साथ काम करेंगे. इसका सीधा मतलब है कि भारत अब सिर्फ मोबाइल असेंबली हब नहीं रहना चाहता, बल्कि चिप और एडवांस टेक्नोलॉजी के ग्लोबल सप्लाई चेन में भी अपनी जगह मजबूत करना चाहता है.

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