पंजाब विधानसभा में बेअदबी बिल पास, 25 लाख तक जुर्माना और उम्रकैद की सजा, विपक्ष ने उठाए सवाल

चंडीगढ़- पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया गया है।

विधेयक में क्या है प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन विधेयक में बेअदबी के मामलों को लेकर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम उम्रकैद और 25 लाख तक जुर्माना लगेगा। सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक ग्रंथों के सम्मान को सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं पर कड़ा नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

कानून बनने की प्रक्रिया
विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही यह कानून लागू होगा। सरकार का दावा है कि यह राज्य का विषय है, इसलिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि कोई कानूनी टकराव सामने नहीं आता, तो अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह तक यह कानून लागू हो सकता है। हालांकि, किसी प्रकार के विवाद की स्थिति में इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है, जिससे प्रक्रिया में देरी संभव है।

विपक्ष ने समर्थन के साथ उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इस मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तैयार रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। इस पर स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने स्पष्ट किया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी और संबंधित मामलों, जिनमें नकोदर कांड भी शामिल है, की जांच भी करेगी। बहस के दौरान बाजवा ने पूर्व में किए गए वादों का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के दावे किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।

इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जवाब देते हुए विपक्ष पर पलटवार किया और कहा कि सरकार अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल और प्रशासनिक फैसले सरकार का अधिकार क्षेत्र है। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया।

बाजवा ने कहा कि उस समय के पांच केस शहर से बाहर चले गए। सरकार ने विरोध नहीं किया। कुंवर विजय प्रताप सिंह पोस्टर बॉय था, वह पार्टी से बाहर है। मैं आपकी सरकार की इंटेंट जाना चाहता हूं। मान साहब दिल बड़ा कर इन पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करो। सीएम ने कहा कि आपका खजाना मंत्री व मुख्यमंत्री पार्टी से बाहर हैं। किसको मंत्री बनाना है या नहीं बनाना यह हमारा फैसला है। आपसे चार साल बाद प्रधानगी छीन ली है। किसी मौके पर तो कोई शर्म रख लिया करो। आज यह मौका नहीं है। इस पर बाजवा ने कहा आपसे लोग जवाब मांगते हैं। सीएम बताएं कि पंजाब पुलिस के कितने अफसरों पर केस दर्ज हुए। उन पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि हम पांचवीं बार कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर हमने कानून माहिरों से बात की है। पहले की तरह इस बिल की स्थिति न हो। हम कानून का समर्थन करते हैं। हम लोागें के बीच ही रहे हैं। 25 साल आपको राज नहीं मिलना है।

पहले भी लाया गया था बिल
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में सरकार ने पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक पेश किया था, जिसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथों को शामिल किया गया था। उस विधेयक में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था, जिसे आगे विचार के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था।

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