पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 13 वन्यजीव अभयारण्य हुए प्लास्टिक-फ्री घोषित
पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य सरकार ने 13 वन्यजीव अभयारण्यों को प्लास्टिक-फ्री घोषित कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य इन संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के बढ़ते खतरे को रोकना और जैव विविधता को संरक्षित करना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन अभयारण्यों में अब सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यटकों को भी प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन बैग और अन्य प्लास्टिक सामग्री लेकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसके स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा, जैसे कि कपड़े या जूट के बैग और पुन: उपयोग योग्य पानी की बोतलें।
वन विभाग ने इस पहल को सफल बनाने के लिए अभयारण्य परिसरों में जागरूकता अभियान शुरू किया है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, प्रवेश द्वारों पर विशेष जांच दल तैनात किए गए हैं ताकि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित सामग्री अंदर न ले जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि प्लास्टिक कचरा वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, क्योंकि कई बार जानवर इसे भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस कदम से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
सरकार ने उम्मीद जताई है कि यह पहल अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी और भविष्य में और अधिक अभयारण्यों को प्लास्टिक-फ्री बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।




