Science & Technology: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा “भारत विश्व स्तरीय लागत प्रभावी स्वास्थ्य सेवा गंतव्य और वैश्विक फार्मा लीडर के रूप में उभर रहा है”

“India is emerging as a world-class cost-effective healthcare destination and global pharma leader” says Union Minister Dr. Jitendra Singh

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नयी दिल्ली के होटल ली मेरिडियन में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित “ग्लोबल मेडटेक समिट 2024” को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व स्तरीय लागत प्रभावी स्वास्थ्य सेवा गंतव्य के रूप में और साथ ही वैश्विक फार्मा उद्योग में लीडर के रूप में उभर रहा है। हाल के दिनों में स्वास्थ्य सेवा में हुए रूपांतरण पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने संचारी रोगों के उन्मूलन और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य सूचकांकों के विकास और निरंतर प्रगति के साथ एक स्वस्थ भारत के लिए एक दृष्टिकोण रखा है।” उन्होंने कहा, “भारत ने कोविड महामारी के दौरान दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया; यह इस बात की पुष्टि करता है कि मोदी सरकार का दृढ़ विश्वास है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।” उन्होंने मेटाबोलिक संबंधी विकारों के नए बोझ और बीमारियों के व्यापक स्पेक्ट्रम के साथ उत्पन्न चुनौतियों और बढ़ती जीवन अवधि पर भी बल दिया, जिससे नई बीमारियां उत्पन्न हुई हैं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री और कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के 2047 विजन को प्राप्त करने के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवा एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह, जो स्वयं मेडिसिन और एंडोक्रिनोलॉजी के प्रोफेसर हैं, ने बड़ी उम्र में होने वाली बीमारी कम उम्र में होना जैसे टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस, कम उम्र में दिल का दौरा, घातक बीमारियां आदि की बढ़ती प्रवृति पर प्रकाश डाला, जो न केवल एक स्वास्थ्य चुनौती है बल्कि महत्वपूर्ण युवा ऊर्जा और युवा क्षमता को समाप्त करने की धमकी भी देती है जो राष्ट्र निर्माण और भारत 2047 विजन को साकार करने में अपना योगदान देगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने “पीपीपी + पीपीपी” सहयोग की वकालत करते हुए भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों से अन्य देशों में अपने समकक्षों के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस तरह की साझेदारी न केवल आर्थिक संसाधनों को बढ़ावा देती है बल्कि ज्ञान संसाधनों को भी बढ़ाती है। उन्होंने इन क्षेत्रों में निजी निवेश और स्टार्टअप संख्या में तेजी से वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, एकीकृत भागीदारी के लिए रोल मॉडल के रूप में अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सफलता की ओर इशारा किया।

डॉ सिंह ने कहा कि “अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सफलता एकीकृत साझेदारी के लिए रोल मॉडल के रूप में कार्य करती है।” मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के कुछ महीनों के अंदर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निजी निवेश हुआ है और 2022 में स्टार्टअप संख्या 1 से बढ़कर वर्तमान में 200 से अधिक स्टार्टअप हो गई है, जिनमें से कुछ में वैश्विक क्षमता है। मंत्री ने भारत को दुनिया के शीर्ष 6 जैव-निर्माताओं में से एक कहा और सबसे अधिक लागत प्रभावी और प्रभावकारिता-आधारित जैव-विनिर्माण के साथ-साथ लागत प्रभावी स्वास्थ्य देखभाल स्थलों में से एक कहा। उन्होंने बीआईआरएसी-जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद को उद्योग संपर्क और अनुसंधान के लिए एक मंच के रूप में संदर्भित किया। मंत्री ने ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों और उनकी उपलब्धियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जैव-विनिर्माण और जैव-फाउंड्री 2014 में 10 बिलियन डॉलर से 10 गुना बढ़कर 2024 में 130 बिलियन डॉलर हो गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों को देश का एक उभरता हुआ क्षेत्र माना जा रहा है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार भारत को विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। मंत्री ने बताया कि सूचकांक बनाने, मानक तय करने और कार्य योजना प्रस्तावित करने के लिए एक शोध समूह स्थापित किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा तक एकसमान पहुंच सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांति ला रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) उपकरणों का एकीकरण प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर हमारी क्षमताओं में बहुत वृद्धि कर सकता है, हम दक्षता बढ़ा सकते हैं, प्रतीक्षा समय कम कर सकते हैं और समग्र स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार कर सकते हैं। टेलीमेडिसिन के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए, मंत्री ने बताया कि कैसे इसने स्वास्थ्य सेवा को रूपांतरित कर दिया है और देश के दूरस्थ गांवों में भी सेवाओं को सुलभ बना दिया है। लेकिन साथ ही, उन्होंने सीपीजीआरएएमएस के साथ अपने अनुभव को साझा किया और कहा कि हमें फीडबैक लेने के लिए मानव डेस्क का उदाहरण साझा करके कभी-कभी एआई को मानवीय मध्यवर्तन के साथ पूरक करना होगा। अंत में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरू से ही मजबूत उद्योग-शिक्षा-अनुसंधान और उद्यमिता संबंधों का आह्वान किया, जिससे 2047 तक स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया जा सके।

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