दिल्ली में बदलेगा मौसम का मिजाज, रहे तैयार; पारा जाएगा 44 के पार

दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) के मुताबिक, मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर अब खत्म हो गया है। अगले कई दिनों तक तापमान में कमी के आसार भी नहीं हैं। शुक्रवार को आंशिक बादल छाए रहेंगे। कुछ इलाकों में लू चलने के भी आसार हैं। अधिकतम तापमान 44, जबकि न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

इससे पहले कुछ दिनों की राहत के बाद बृहस्पतिवार को फिर गर्मी ने तल्खी अख्तियार कर ली। सुबह के समय भी खासी गर्मी महसूस हुई। उमस ने भी दिल्लीवासियों को बेहाल कर रखा है। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में इजाफा देखा गया। आमतौर पर सुबह के समय मौसम थोड़ा ठंडक वाला होता है। धूप चढ़ने के साथ ही गर्मी बढ़ने लगती है। बृहस्पतिवार को पालम क्षेत्र में तो अधिकतम तापमान 45.3 और न्यूनतम तापमान 29.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। हालांकि मौसम विभाग ने औसत अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक 43.9 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। नमी का स्तर अधिकतम 66 और न्यूनतम 19 फीसद दर्ज किया गया।

दिल्ली में तीन दिन देरी से आएगा मानसून

मौसम विभाग ने दिल्ली में मानसून के आगमन में तीन दिन की देरी की संभावना जताई है। शहर में मानसून की बारिश भी सामान्य ही रहने का अनुमान है। हालांकि निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने एक दिन पहले ही कहा था कि मानसून के दिल्ली आने में कम से कम एक सप्ताह का विलंब हो सकता है।

मौसम विभाग के प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य रूप से मानसून 29 जून तक दिल्ली पहुंचता है। लेकिन इस बार इसके दक्षिणी भाग में पहुंचने में देरी हो रही है। लिहाजा, मानसून के उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंचने में भी तीन दिन ज्यादा लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि मानसून की प्रगति में सहायक दक्षिण-पश्चिमी हवा तथा सोमाली जेट स्ट्रीम जैसे कारक धीरे-धीरे सक्रिय हो रहे हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून के दौरान सामान्य स्तर की बारिश होने की संभावना है।

गौरतलब है कि बुधवार को स्काईमेट के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने कहा था, यह कहना मुश्किल है कि मानसून दिल्ली कब पहुंचेगा, लेकिन संभावना है कि इसके आने में कम से कम एक सप्ताह की देरी होगी। उन्होंने कहा, मानसून की शुरुआत होने पर, अरब सागर के ऊपर कम दबाव वाला क्षेत्र बनने की संभावना है और यह धीरे-धीरे बढ़ सकता है। जब भी इस तरह की मौसम की स्थिति बंगाल की खाड़ी या अरब सागर के ऊपर विकसित होती है, नमी से पूर्ण हवा इसके आसपास एकत्रित होने लगती है, जिससे मानसून की प्रगति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, इसलिए अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसून की गति धीरे रहेगी।

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