देश के कई राज्‍यों में पानी के लिए हाहाकार

नई दिल्‍ली। देश के कई हिस्‍से में पानी की कमी ऐसी है कि फसलों को सींचना तो दूर जल्‍द ही पेयजल की भी आफत हो जाएगी। इतिहास में पहली बार भारत में इस तरह का जल संकट है जब भारत के कई राज्‍यों में एक साथ बढ़ती गर्मी की तपिश के साथ जल संकट गहराता जा रहा है। उसपर से मानसून की देरी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अब मानसून की दिशा और दशा ही तय जल संकट के बदतर हालात में सुधार का फैसला करेगी। नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में जलस्रोतों के उचित प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा गया है कि 2020 तक भारत के 21 शहरों में जलस्‍तर की कमी हो जाएगी।

मध्‍यप्रदेश के बेतुल में आलम यह है कि मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है जिसके कारण यहां लड़कियां स्‍कूल नहीं जा पा रही हैं। सिर पर पानी का घड़ा लिए लड़कियों ने बताया, ‘आजकल हम स्‍कूल नहीं जा पाते क्‍योंकि हमारा दिन मीलों दूर से पानी लाने में ही चला जाता है।’

यहां के लोग पानी लाने के लिए सुबह चार बजे जग जाते हैं और 3 किमी की दूरी तय करते हैं। यहां के स्‍थानीय लोगों का कहना है कि इतनी दूर से मेहनत कर जहां से  हम पीने के लिए पानी लाते हैं वह भी स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से ठीक नहीं। सरकार को इस दिशा में जल्‍द से जल्‍द कुछ करना होगा ।

चेन्‍नई के कासिमेडु, रोयापुरम में लोगों ने सड़क पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।

बढ़ती जा रही गर्मी की तपिश, गहराता जा रहा जल संकट

इस साल देश में पानी को लेकर बदतर हालात हैं। भारत के पश्चिम और दक्षिण के कई राज्यों में जलसंकट गहराता जा रहा है। राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्‍ट्र, चेन्‍नई, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, राजस्थान में ताल-तलैया सूखे पड़े हैं। वहीं गर्मी की तपिश ऐसी बढ़ी हुई है कि कई राज्‍यों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। इनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र के अनेक शहर शामिल हैं।

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