लव-मैरिज की तो पंचायत ने किया परिवार का बहिष्कार

  • सारंगढ़ के कपिस्दा गांव का मामला, जाति की लड़कियों से ही मंदिर में की शादी फिर भी बवाल
  • दुकानदार नहीं देते सामान, पीडीएस की सरकारी दुकान से भी नहीं मिल रहा है राशन

रायगढ़/ कोसीर. अपनी ही जाति की दो युवतियों से दो भाइयों ने प्रेम विवाह किया तो पूरे परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। थाना प्रभारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक से शिकायत कर चुके हैं। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से पूरा परिवार अपना घर छोड़कर दर-दर भटकने को मजबूर है। हालात यह हो गए हैं कि कोई दुकानदार उन्हें सामान नहीं देता। यहां तक कि पीडीएस की सरकारी दुकान से भी राशन नहीं दिया जा रहा। मामला सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम कपिस्दा (अ) का है।

परिवार से बात करने पर भी पंचायत ने लगाया पांच हजार रुपए जुर्माना

  1. जानकारी के मुताबिक, गांव के दो चचेरे भाई संजय और देवनारायण लहरे ने गांव की दो युवतियों हेमलता और पुर्णिमा से 17 मई को लव मैरिज की। युवकों के परिवार वालों ने पहले रिश्ते का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, जब लड़की पक्ष ने इसे ठुकरा दिया तो दोनों युवकों ने मंदिर में जाकर शादी कर ली। जानकारी होने के बाद लड़कियों के परिजनों ने परिवार का विरोध करना शुरू कर दिया।
  2. मामला पंचायत पहुंचा तो वहां बाकायदा प्रस्ताव पारित कर लहरे परिवार को बहिष्कृत किया गया। अब गांव में लहरे परिवार का जीना मुश्किल हो गया। सरकारी राशन दुकान से अनाज नहीं दिया जाता। बाजार में कोई भी दुकानदार उन्हें सामान नहीं देता। अपने खेत तक ट्रैक्टर ले जाने के लिए दूसरे खेतों से होकर गुजरना पड़ता है, उसकी अनुमति भी नहीं दी जा रही। सरकारी बोर-बोरिंग से पानी नहीं दिया जा रहा है। गांव का कोई भी व्यक्ति यदि उनसे बात करेगा तो उसे पंचायत में 5 हजार रुपए जुर्माना देना होगा।
  3. गांव के सभी लोगों ने लहरे परिवार से नाता तोड़ लिया। इस तरह की परेशानी से वे पिछले 19 दिनों से जूझ रहे हैं। मामले में लहरे परिवार ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत। लेकिन, कोई नतीजा नहीं निकला।
  4. कड़ा कानून नहीं बना सकी सरकार

    प्रदेश में अंतरजातीय विवाह या सामाजिक कायदों की अनदेखी का आरोप लगाकर किए जाने वाले सामाजिक बहिष्कार के लगभग साढ़े 28 हजार मामले आए हैं। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार रोकने कोई कड़ा कानून नहीं बन सका। महाराष्ट्र में यह कानून 2016 में लागू किया जा चुका है। लगभग चार सालों से सामाजिक बहिष्कार को रोकने या इस पर दंड देने वाले अधिनियम का मसौदा बनकर तैयार है। इस पर प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन पिछले दो सालों से प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। अधिनियम पर अगस्त-2017 में सरकार ने इस पर दावा-आपत्ति मंगाई थी। तब समाजसेवी संगठनों ने इसे लागू करने की मांग की थी। कुछ समाजों ने सामाजिक ढांचा कमजोर होने का हवाला देते हुए इसका विरोध किया था। फाइल पीएचक्यू से आगे नहीं बढ़ पाई है। पिछली सरकार ने इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं की।

  5. गांव में कराई गई मुनादी

    शादी के बाद जब दोनों भाई अपनी-अपनी वधु को लेकर घर पहुंचे तो सब कुछ सामान्य था। एक दिन तक गांव के लोगों ने उनसे बातचीत की। दूसरे दिन यानि 18 मई को गांव के कोटवार ने पूरे गांव में मुनादी कर दी कि लहरे परिवार को बहिष्कृत कर दिया गया है। परिवार का हुक्का-पानी बंद करते हुए यह धमकी भी दी गई कि जो भी उनकी मदद करेगा उस पर 5 हजार रुपए अर्थदंड लगाया जाएगा।

  6. गांव के लोग परिवार से परेशान हैं, इसलिए ऐसा निर्णय लिया

    लहरे परिवार का ये पहला मामला नहीं है। पूर्व में एक साहू समाज की लड़की से परिवार के एक लड़के ने शादी कर ली थी। इसके बाद एक और भी मामला ऐसा हुआ था। गांव के लोग परिवार से परेशान हैं, इसलिए गांव में सामूहिक बैठक करके ऐसा निर्णय लिया गया है।

    शकुंतला साहू, सरपंच कपिस्दा (अ)
  7. थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि वे गांव जाकर लोगों से बात करें

    हमारे पास आवेदन आया है हम जांच कर रहे है, मैंने थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि वे गांव जाकर लोगों से बातचीत करें। उनको समझाएं। लड़कियां बालिग हो चुकी हैं इसलिए लड़कों के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकती। गांव जाऊंगा, लहरे परिवार की समस्या का हल निकालेंगे।

    HAMARA METRO

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