EXCLUSIVE: World Cup 2019 सचिन की तरह धौनी को विदाई दे भारतीय टीम : सुरेश रैना

World Cup 2019 बेशक विराट कोहली (Virat Kohli) मैदान पर भारतीय टीम की कमान संभालते नजर आते हों, लेकिन मैदान पर आज भी पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के ही सुझाव ज्यादातर कारगर होते हैं। विश्व कप में भारतीय टीम को धौनी के अनुभव की सख्त जरूरत है। धौनी और भारतीय टीम की तैयारियों और रणनीतियों के बारे में धौनी के साथ लंबे समय तक ड्रेसिंग रूम साझा करने वाले सुरेश रैना से अभिषेक त्रिपाठी ने विशेष बातचीत की। पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंश :

-भारत विश्व कप से पहले अपना पहला अभ्यास मैच हार गया था। इंग्लैंड की परिस्थिति से आप अच्छी तरह से वाकिफ हैं। ऐसे में विश्व कप में भारत को कैसे देखते हैं?

–देखिए, मुझे तो लगता है कि अच्छा हुआ हम पहला अभ्यास मैच हार गए, क्योंकि तब टॉस के समय विराट ने भी कहा था कि हम थोड़ा चुनौतीपूर्ण अभ्यास मैच चाहते हैं। ऐसे में मेरा मानना है कि भारत को पहले अभ्यास मैच में एक अच्छा चुनौतीपूर्ण मुकाबला खेलने को मिला क्योंकि जिन चीजों की वजह से आप हारते हो, उन चीजों को आगे ठीक करने की कोशिश करते हो। रही बात टीम संयोजन की तो वह देखना पड़ेगा। भारतीय टीम की गेंदबाजी बहुत अच्छी है, लेकिन बल्लेबाजी में उसके शीर्ष तीन बल्लेबाजों को रन बनाने होंगे, क्योंकि मध्य क्रम ज्यादा मजबूत दिखाई नहीं दे रहा है।

-विराट कोहली ने भी कहा है कि जब शीर्ष क्रम के बल्लेबाज नहीं चले तो मध्य क्रम के बल्लेबाजों को जिम्मेदारी उठानी होगी। ऐसे में मध्य क्रम से कैसे प्रदर्शन की उम्मीद करें?

–सबसे पहले तो उन्हें तय करना होगा कि केएल राहुल को खिलाना है या दिनेश कार्तिक को खिलाना है। हालांकि, अगर केदार जाधव फिट रहते हैं तो वह भी खेल सकते हैं, क्योंकि वह गेंदबाजी में भी चार-पांच ओवर का योगदान दे सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि हार्दिक पांड्या और विजय शंकर अपना स्पैल पूरा कर पाएंगे। ऐसे में हमें कोई ऐसा पार्ट टाइम गेंदबाज चाहिए जो जडेजा या कुलदीप के साथ चार-पांच ओवर डाल सके। हालांकि, इंग्लैंड में यह भी निर्भर करेगा कि टीम इंडिया पहले बल्लेबाजी करना चाहती है या फिर लक्ष्य का पीछा करना चाहती है। मुझे ऐसा लगता है कि हमारी गेंदबाजी के दम पर हम लक्ष्य का बचाव कर सकते हैं, लेकिन एक अच्छा लक्ष्य देने के लिए शीर्ष तीन बल्लेबाजों का रन बनाना बहुत जरूरी है।

-पहले अभ्यास मैच में हमने देखा कि बादल की वजह से न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने हमें खूब परेशान किया, लेकिन हाल के दिनों में इंग्लैंड में खूब रन बने हैं। ऐसे में पिच के मिजाज को लेकर आप क्या कहेंगे?

–देखिए, जहां बादल ज्यादा होते हैं वहां चुनौती बढ़ जाती है। भारतीय बल्लेबाजों को पिछले तीन वर्षो में सबसे ज्यादा परेशान बायें हाथ के तेज गेंदबाजों ने किया है। ऑस्ट्रेलिया के जेसन बहरनडॉर्फ फिर मिशेल स्टार्क और हाल ही में न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। आज के समय में हर टीम के पास बायें हाथ के अच्छे तेज गेंदबाज हैं और भारतीय टीम को पता है कि उसे बायें हाथ के तेज गेंदबाजों से निपटना होगा। चैंपियंस ट्रॉफी में मुहम्मद आमिर ने जैसा स्पैल डाला था और अब बोल्ट ने जैसा प्रदर्शन किया है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि शुरुआती 10-15 ओवर तक संभलकर खेलना होगा। क्योंकि 10 से 15 ओवर के खेल में अगर विराट कोहली को बल्लेबाजी करने के लिए आना पड़ा तो फिर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

-भारतीय टीम को अपने शुरुआती चार मैच बड़ी टीमों के खिलाफ खेलने हैं। ऐसे में आप इसे कैसे देखते हैं?

–मेरे हिसाब से यह अच्छी बात है कि शुरुआत में ही हम अच्छी टीमों के खिलाफ खेल रहे हैं क्योंकि इससे बाद में जटिलताएं नहीं बढ़ेंगी। आपको शुरुआत से ही गेंद दर गेंद अच्छी क्रिकेट खेलनी होगी। मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि विराट कैसे हार्दिक, जडेजा और शंकर का इस्तेमाल करते हैं। अगर केदार फिट नहीं हैं तो विराट को छह गेंदबाजी विकल्पों के साथ उतरना पड़ेगा, जिसमें बुमराह, शमी, भुवनेश्वर, हार्दिक, कुलदीप और चहल जैसे गेंदबाज हैं।

-पहले अभ्यास मैच में हार्दिक को पांचवें क्रम पर खेलने के लिए भेजा गया था। इस पर आपकी क्या राय है?

–उस समय हमारे विकेट जल्दी-जल्दी गिरे थे जिसके बाद टीम चाहती थी कि धौनी थोड़ा रुककर बल्लेबाजी के लिए आएं, क्योंकि मध्य क्रम में धौनी की भूमिका काफी अहम हो जाएगी। दिनेश कार्तिक को मध्य क्रम में बहुत मौके मिले, लेकिन मेरे हिसाब से उन्होंने अब तक कुछ खास प्रभावित नहीं किया है। ऐसे में केएल राहुल ज्यादा सही हैं। हालांकि, शीर्ष तीन बल्लेबाजों में से किसी एक को 30 से 40 ओवर खेलना ही पड़ेगा। वहीं, मध्य क्रम की बल्लेबाजी धौनी, पांड्या और जडेजा के आस-पास ही रहेगी। चौथे नंबर पर अगर राहुल खेलते हैं तो इससे टीम का संयोजन थोड़ा बेहतर हो जाएगा। ओपनिंग में रोहित और शिखर के बाद विराट, फिर चौथे पर राहुल, पांचवें पर धौनी, छठे पर हार्दिक और सातवें पर जडेजा और फिर चार गेंदबाजों का संयोजन भारत के लिए अच्छा रहेगा। भारत के ज्यादातर मुकाबले सीम वाली परिस्थितियों में खेले जाएंगे जिसमें साउथैंप्टन, नॉटिंघम और ओवल के मैदान शामिल हैं। इस बार हमें स्पिनरों के मुफीद विकेट नहीं मिले हैं। भारत और पाकिस्तान का मैच भी मैनचेस्टर में है जहां गेंद ज्यादा स्पिन नहीं करती है।

-आप धौनी के साथ काफी क्रिकेट खेल चुके हैं और आइपीएल में भी खेलते हैं। ऐसे में टीम में धौनी की कितनी अहमियत है?

–मुझे लगता है कि वह विकेट के पीछे भी एक कप्तान की भूमिका में होते हैं। किस गेंदबाज के खिलाफ किस क्षेत्ररक्षक को कहां रखना है, स्लिप का क्षेत्ररक्षक चाहिए या नहीं चाहिए, थर्डमैन कितना फाइन रखना है, यह सब काम वह विकेटों के पीछे से करते हैं। ऐसे में भले ही कागजों पर वह कप्तान नहीं हों, लेकिन मैदान पर अभी भी वह कप्तान की भूमिका में होते हैं, क्योंकि वह विराट को अपने अनुभव से काफी लाभ पहुंचाते हैं। मेरा मानना है कि वह कप्तान नहीं होते हुए भी कप्तान हैं। आपने सुना होगा कि करीब-करीब सभी गेंदबाजों ने माना है कि माही के विकेटों के पीछे होने से उन्हें काफी लाभ मिलता है।

-कहा जाता है कि धौनी अपनी विकेटकीपिंग के लिए ज्यादा अभ्यास नहीं करते हैं और उनका दिमाग इतना तेज चलता है कि उन्हें सब पता चल जाता है। क्या धौनी अलग-अलग टूर्नामेंट के लिए अलग-अलग तैयारी करते हैं?

-धौनी कही भी खेलें उनका गेम प्लान बहुत सामान्य रहता है। उनकी प्रक्रिया बहुत सही है। एक विकेटकीपर के तौर पर आपको काफी सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। मेरे हिसाब से वह मानसिक और शारीरिक रूप से काफी फिट है। इंग्लैंड में उन्हें खेलने का बहुत अनुभव है। ऐसे में जब आपके पीछे एक इतना अनुभवी खिलाड़ी रहता है जिससे काफी फर्क पड़ता है। वह विकेटकीपिंग का ज्यादा अभ्यास नहीं करते हैं और ना ही मैच से पहले वह बल्लेबाजी का अभ्यास करते हैं। वह सीधे बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं। वह अपनी चीजों को लेकर बहुत स्पष्ट हैं कि उन्हें उनको कैसे करना है।

-मैदान पर धौनी को हम सभी ने देखा है, लेकिन मैदान से बाहर वह कैसे रहते हैं?

–मैदान से बाहर वह खुद को काफी व्यस्त रखते हैं। वह गेम खेलते हैं और क्रिकेट के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं। मैदान से बाहर के समय को वह अच्छे से इस्तेमाल करते हैं। वह टीम के साथी खिलाडि़यों से मिलते-जुलते रहते हैं। थोड़े समय के लिए खेल को खुद से दूर रखकर वह अच्छा महसूस करते हैं।

-ऐसा कहा जा रहा है कि यह धौनी का आखिरी विश्व कप होगा। आप क्या चाहते हैं कि वह कब तक क्रिकेट खेलते रहें?

–यह तो उन्हीं को पता होगा कि वह कब तक क्रिकेट खेलना चाहते हैं। मेरे लिए तो यही मायने रखता है कि जैसा हमने सचिन तेंदुलकर को 2011 विश्व कप खिताब जीतकर शानदार विदाई दी थी, कुछ वैसे ही मौजूदा भारतीय टीम को धौनी के लिए करना चाहिए।

-विश्व कप में भारत और पाकिस्तान को भी भिड़ना है। एक खिलाड़ी के नाते आपको क्या लगता है कि क्या यह सिर्फ एक आम मैच की तरह है?

-भले ही लोगों को लगता है कि यह एक आम मैच की तरह है, लेकिन खिलाडि़यों के नजरिये से यह बहुत अहम मैच हो जाता है। विश्व कप में पाकिस्तान से भारत कभी नहीं हारा। वैसे विराट ने अभी कहा था कि यह मैच आम मैचों की तरह ही होगा, लेकिन ऐसे मैचों में खिलाडि़यों पर ज्यादा दबाव और जिम्मेदारी बढ़ जाती है। मैदान के बाहर इतने सारे भारतीय प्रशंसक मैदान पर तिरंगे के साथ आते हैं कि इसकी अहमियत वैसे ही बढ़ जाती है। ऐसे में खिलाडि़यों के लिहाज से अपने देश के लिए अच्छा करने का दबाव आ जाता है क्योंकि इस मैच के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ जाती हैं। ऐसे में मेरा मानना है कि भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में दोनों टीमों के खिलाडि़यों पर काफी दबाव होता है।

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