देशभर में विजयादशमी और दशहरा की धूम, बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
देशभर में 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा का पर्व धार्मिक श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर विभिन्न शहरों और कस्बों में धार्मिक कार्यक्रमों, रामलीला मंचनों तथा रावण दहन की तैयारियां की गई हैं। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। त्योहार को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल देखने को मिल रही है।
विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की थी। वहीं, धार्मिक परंपरा में यह दिन मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इस कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा विभिन्न रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
दिल्ली सहित कई शहरों में रामलीला के अंतिम मंचन और रावण दहन को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। कई स्थानों पर रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी जलाए जाते हैं। इन आयोजनों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है। भीड़ को देखते हुए आयोजकों और संबंधित प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा लोगों की सुविधा पर ध्यान दिया जाता है।
दशहरे के अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ उत्सव में भाग लेते हैं। कई स्थानों पर मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी होते हैं। बाजारों में मिठाइयों, पूजा सामग्री और त्योहार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी की जाती है।
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज को सत्य, न्याय, सदाचार और सकारात्मक विचारों का महत्व भी समझाता है। विजयादशमी लोगों को प्रेरित करती है कि वे अपने जीवन में बुराइयों का त्याग करें और अच्छे कार्यों को अपनाएं। देशभर में मनाया जा रहा यह पर्व सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सद्भाव का संदेश देता है।




