दिल्ली में नए निजी विद्यालय खोलने के नियमों में बदलाव
दिल्ली सरकार ने नए निजी विद्यालय खोलने और उन्हें मान्यता देने से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। दिल्ली विद्यालय शिक्षा (संशोधन) नियम, 2026 को 30 सितंबर को अधिसूचित किया गया। इसके तहत निजी विद्यालयों की स्थापना और मान्यता की प्रक्रिया में कुछ पुरानी अनिवार्यताओं को हटाया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार, निजी स्वामित्व वाली व्यावसायिक भूमि पर विद्यालय स्थापित करने वाले समाजों और सार्वजनिक न्यासों को अब सार्वजनिक हित के आकलन की पुरानी प्रक्रिया से छूट मिलेगी। पहले नए विद्यालय के प्रस्ताव पर संबंधित क्षेत्र में उसकी आवश्यकता और वहां पहले से मौजूद विद्यालयों की संख्या जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता था। अब इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
मान्यता लेने वाले नए निजी विद्यालयों के लिए भी स्थानीय क्षेत्र में नए विद्यालय की आवश्यकता साबित करने की शर्त हटाई गई है। सरकार का कहना है कि इससे विद्यालय खोलने और मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी तथा अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी।
हालांकि, सरकारी या नगर निगम की संस्थागत भूमि पर विद्यालय स्थापित करने वालों के लिए नियम अलग रहेंगे। ऐसी भूमि खरीदने या आवंटित होने से पहले समाजों और सार्वजनिक न्यासों को उपराज्यपाल से आवश्यक प्रमाणपत्र लेना होगा। इस प्रमाणपत्र के माध्यम से प्रस्तावित क्षेत्र में विद्यालय की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा।
नियमों में बदलाव का उद्देश्य विद्यालय स्थापना की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन विद्यालयों को शिक्षा, आधारभूत ढांचे, सुरक्षा और अन्य निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। इससे निजी विद्यालयों की संख्या और उपलब्धता पर आने वाले समय में प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षा क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों ने इन बदलावों को निजी विद्यालयों के विस्तार की दिशा में नीति परिवर्तन के रूप में देखा है, जबकि सरकार इसे प्रक्रिया को सरल और नियमों को अधिक वस्तुनिष्ठ बनाने का कदम बता रही है।




