डीयू छात्रसंघ चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, मतगणना रोकने की चेतावनी

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने परिसर में कथित हिंसा, तोड़फोड़ और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस से चुनाव प्रचार के दौरान हुई घटनाओं तथा आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई गई तो मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं पर चिंता जताई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनावी नियमों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन नहीं किया गया। बाहरी लोगों की मौजूदगी, प्रचार के दौरान अनुशासनहीनता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मुद्दे भी अदालत के सामने उठाए गए।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से पूछा कि कथित घटनाओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने अधिकारियों को अपनी कार्रवाई का विवरण रिपोर्ट के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने फिलहाल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान पर रोक नहीं लगाई है। डीयू छात्रसंघ चुनाव के लिए 18 सितंबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 19 सितंबर को प्रस्तावित है। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया है कि चुनाव प्रक्रिया की अगली स्थिति अधिकारियों की रिपोर्ट और उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्भर कर सकती है।

इस घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आचार संहिता के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अदालत का निर्देश चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

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