दिल्ली-एनसीआर में ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल की चेतावनी, किराया बढ़ाने की मांग तेज
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती सीएनजी कीमतों के बीच ऑटो और टैक्सी चालकों की परेशानी बढ़ गई है। विभिन्न चालक संगठनों ने ईंधन की बढ़ती लागत और लंबे समय से किराया दरों में बदलाव नहीं होने के विरोध में तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा किराया व्यवस्था में वाहन चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और चालकों की आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है।
चालक संगठनों के मुताबिक दिल्ली में सीएनजी की कीमत में हाल ही में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद राजधानी में सीएनजी की कीमत 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। चालकों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के साथ वाहन की मरम्मत, बीमा, रखरखाव और अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में वर्तमान किराए पर काम करने से दैनिक आमदनी का बड़ा हिस्सा वाहन संचालन में ही खर्च हो जाता है।
यूनियनें सरकार से ऑटो और टैक्सी का किराया बढ़ाने के साथ चालकों की आर्थिक समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि किराया दरों में लंबे समय से पर्याप्त बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान ईंधन और दूसरे परिचालन खर्च काफी बढ़ चुके हैं। कुछ संगठनों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों से बातचीत और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन की भी योजना बनाई है।
हड़ताल की स्थिति में दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और रेलवे स्टेशन तथा हवाई अड्डे जाने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भरता बढ़ सकती है। हालांकि, सभी ऑटो-टैक्सी यूनियनें हर हड़ताल में एकजुट नहीं रहतीं, इसलिए इसका प्रभाव क्षेत्र और संगठन के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह चालकों की बढ़ती लागत और यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त किराये के बोझ के बीच संतुलन बनाए। यदि समय रहते बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल दिल्ली-एनसीआर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।




