फर्जी कॉलेजों पर सख्त हुआ दिल्ली हाईकोर्ट, छात्रों के भविष्य को लेकर केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों के बढ़ते मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित शिक्षा नियामक संस्थाओं से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि नकली विश्वविद्यालयों और अवैध कॉलेजों के कारण हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि छात्रों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई फर्जी संस्थान बिना मान्यता के डिग्री और डिप्लोमा कोर्स चला रहे हैं। ये संस्थान आकर्षक विज्ञापनों और झूठे दावों के जरिए छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं। कई छात्र अपनी मेहनत की कमाई और वर्षों का समय ऐसे संस्थानों में लगा देते हैं, लेकिन बाद में उनकी डिग्रियां अमान्य साबित होती हैं। अदालत ने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), शिक्षा मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने पूछा है कि फर्जी संस्थानों की पहचान करने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और छात्रों को जागरूक करने के लिए क्या ठोस व्यवस्था बनाई गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते दौर में निगरानी व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि कई निजी संस्थान खुद को “इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी” या “ग्लोबल एजुकेशन सेंटर” बताकर छात्रों से भारी फीस वसूल रहे हैं। इनमें से कई संस्थानों को किसी भी सरकारी संस्था से मान्यता प्राप्त नहीं है।

अदालत ने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि छात्रों को मान्यता प्राप्त संस्थानों की सही जानकारी आसानी से उपलब्ध हो। साथ ही फर्जी संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है।

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