केरला से नर्मदा घाटी वासियों के हाल जानने पहुंची छात्राएं

-जिले के डूब गांव, मूलगांव और टिनशेडों में पहुंची देखी स्थिति

✍️इम्तियाज खान✍️

बड़वानी। सरदार सरोवर बांध प्रभावितों के हक-अधिकार के लिए बीते साढ़े तीन दशकों से लड़ रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के संघर्ष की जानकारी पाकर केरला की तीन छात्राएं जिले के नर्मदा तटीय क्षेत्रों का भ्रमण कर रही है। रविवार को यह छात्राएं जिला मुख्यालय के समीप राजघाट (कुकरा) गांव पहुंची। इस दौरान छात्राओं ने शोध के लिहाज से नर्मदा तट का मुआयना किया। और नबआं कार्यकर्ताओं और डूब प्रभावितों से चर्चा कर उनके दुख-संघर्ष को जाना।
ग्रामीण देवेंद्र सोलंकी, नबआं की कमला जीजी सहित ग्रामीणों ने छात्राओं का अभिवादन किया और नर्मदा घाटी का इतिहास, डूब का संघर्ष सहित धार्मिक, प्राकृतिक व अध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। छात्राओं ने अपनी डायरी में घाटी की दास्तां उकेरी। केरला राज्य की छात्रा सावित्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से सोशलेंजिन की डिग्री की है। वहीं उनके साथ समाद्रिता और अंजना भी आई है। छात्रा समाद्रिता ने सोशल वर्क में मास्टर डिग्री और अंजना गणितज्ञ डिग्री हासिल कर चुकी है। छात्राओं ने बताया कि उन्होंने बांध की डूब में आई नर्मदा घाटी और नर्मदा बचाओ आंदोलन के संघर्ष को काफी पढ़ा व सुना है। सोशल वर्क के लिहाज वो बीते माह 31 दिसंबर को बड़वानी जिले में आए है।
छात्राओं ने बताया कि अब तक बड़वानी और धार जिले के कई तटीय गांवों के डूब के बाद हाल जाने और प्रभावितों के हक-अधिकार नहीं मिलने की दास्तां सुनी। वहीं विस्थापितों के लिए बनाए टिनशेड व पुनर्वास स्थलों के हाल जाने। उन्होंने कहा कि पुनर्वास स्थलों पर देखने पर पाया कि मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहीं जो टिनशेड बनाए हैं, वहां सारी सुविधाएं हटा ली गई है। जो जानकारी मिली हैं कि यह क्षेत्र में गर्मी अधिक पड़ती हैं, ऐेसे में डूब प्रभावित टिनशेड में गर्मी के दिन कैसे निकालते होंगे, यह बड़ा संघर्ष है।
टापू पर मनाएंगे गणतंत्र दिवस
ग्रामीण देवेंद्र सोलंकी ने बताया कि राजघाट-कुकरा गांव के 17 परिवारों को अब तक जमीन-मुआवजा नहीं मिला। पूर्ण डूब के बावजूद ग्रामीण टापू पर ही डटे रहे है। डूब का पानी उतरने के बावजूद अब तक यहां विद्युत सप्लाई शुरू नहीं हुआ। बारिश के समय से ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर है। वहीं टिनशेडों में बिजली-पानी जैसी सुविधाएं छिन ली गई है। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी को कुकरा टापू स्थल पर ही तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाएंगे।

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