भारत में अब असम के अलावा छत्तीसगढ़ मे भी चाय की खेती काफी बढ़, राज्य में खुशी की लहर

छत्तीसगढ़ के जशपुर में चाय की खेती 5 साल पहले शुरू की कई थी। अब इस खेती का दायरा काफी बढ़ता जा रहा है। पूरे उत्तरी छत्तीसगढ़ के पहाड़ी इलाकों में चाय के बागान से भरे हुए नजर आ रहे हैं। इसमें कई सारे जिले और जुड़ चुके हैं। इसमें जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर जिले शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा के मैनपाट में नए बागान बड़े भू-भाग पर स्थापित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। राज्य के एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर ने भी पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ की जलवायु को चाय की खेती के अनुकूल पाया है। इसका मतलब ये भारत के लिए काफी अच्छी खबर है।

जल्द बलरामपुर जिले में भी चाय की खेती होगी
कृषि विज्ञान केंद्र जशपुर, सरगुजा जिले के बाद बलरामपुर जिले के सामरी पाठ क्षेत्र में भी चाय की खेती की संभावनाएं तलाश रहा है। किसानों की समृद्घि को देखते राज्य सरकार भी इसमें विशेष पहल कर रही है। उत्तरी छत्तीसगढ़ को चाय के बागान से गुलजार करने के लिए मैनपाट का चयन किया गया। यहां 30 प्रगतिशील किसानों को साथ लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक जशपुर जिले के सारडीह स्थित चाय की खेती की संभावना जताई जा रही है।

वन विभाग ने जाहिर की खुशी
वन विभाग के अधिकारियों व चाय की खेती में लगी, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने चाय की खेती से बदली आर्थिक स्थिति को लेकर अपनी खुशी इजहार किया है।  कृषि वैज्ञानिकों मौसम की अनुकूलता को देखते हुए जशपुर की तरह मैनपाट में भी बेहतर खेती की बात कही जा रही है।

समान जलवायु से बढ़ रही हैं उम्मीदें

जशपुर, मैनपाट और सामरीपाट की जलवायु लगभग एक समान है। मैनपाट में तिब्बती के साथ ही स्थानीय किसान बड़े पैमाने पर टाउ की खेती करते हैं। वर्तमान में सामरी व जशपुर के किसान भी बड़े पैमाने पर फसल ले रहे हैं। इसकी खास वजह यही है कि इन क्षेत्रों की जलावायु प्रतिकुल है। इन क्षेत्रों में बढ़ती चाय की खेती से वहां की किसानों में खासा उत्साह भी देखने को मिल रहा है।

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