दावत नहीं दे सकते इसलिए 2 लाख से ज्यादा आदिवासी जोड़े लिव-इन में रहने को मजबूर

मेट्रो शहरों में लिव-इन रिलेशनशिप भले ही नया हो, मगर झारखंड के आदिवासी समाज में यह बरसों पहले से मौजूद है।

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