मुंबई की एनआईए कोर्ट में पेश हुईं प्रज्ञा ठाकुर

  • कोर्ट ने प्रज्ञा को हफ्ते में एक दिन पेश होने का आदेश दिया, गुरुवार को बीमारी के कारण नहीं हो पाई थीं पेश
  • 29 सितंबर 2008 में मालेगांव धमाके में 7 लोग मारे गए थे, इस मामले में 9 साल जेल में रहने के बाद प्रज्ञा को सशर्त जमानत मिली

मुंबई. मालेगांव धमाकों की आरोपी और भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर शुक्रवार दोपहर मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट में पेश हुईं। इस दौरान जज ने उनसे दो सवाल पूछे। जिसका उन्होंने, ‘मुझे नहीं पता’ कहकर जवाब दिया। प्रज्ञा को गुरुवार को ही कोर्ट में पेश होना था, लेकिन बीमारी की वजह से वे मुंबई नहीं पहुंच सकी थीं।

जज के सवालों पर प्रज्ञा का जवाब-
प्रज्ञा से विशेष एनआईए कोर्ट के जज ने पूछा, “क्या आप जानती हैं या आपके वकील ने आपको इस बारे में बताया है कि अभियोजन पक्ष ने अब तक कितने गवाहों की जांच की है?” इस पर प्रज्ञा ने कहा,” मुझे नहीं पता।”

जज ने दूसरा सवाल पूछा, “अब तक जांच में गवाहों ने कहा है कि 29 सितंबर 2008 को एक धमाका हुआ था, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। आपका क्या कहना है?” इस पर भी प्रज्ञा ने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता।”

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हर हफ्ते कोर्ट में पेश होने का आदेश

3 जून को मुंबई की एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा को हर हफ्ते कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। प्रज्ञा ने बीमारी और संसद में औपचारिकताएं पूरी करने का हवाला देकर पेशी से छूट दिए जाने की गुजारिश की थी, लेकिन विशेष अदालत ने इससे इनकार कर दिया था।

मालेगांव धमाके में 7 लोग मारे गए थे
29 सितंबर 2008 में मालेगांव धमाके में 7 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। सरकार ने मामले की जांच एटीएस को सौंपी थी। 24 अक्टूबर, 2008 को इस मामले में स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। 3 आरोपी फरार दिखाए गए थे। बाद में यह जांच एनआईए को सौंप दी गई थी। अप्रैल 2017 में साध्वी प्रज्ञा को 9 साल कैद में रहने के बाद सशर्त जमानत दी गई थी।

गोडसे वाले बयान पर प्रज्ञा को भाजपा से मिल सकती है राहत
महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को देश भक्त बताने वाले बयान पर प्रज्ञा को भाजपा से राहत मिल सकती है। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रज्ञा ने गोडसे को देशभक्त करार देते हुए कहा था, “नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। गोडसे को आतंकवादी कहने वाले लोग स्वयं के गिरेबान में झांककर देखें।” प्रज्ञा के इस बयान पर पार्टी की अनुशासन समिति ने नोटिस जारी किया था, जिस पर प्रज्ञा ने अपना जवाब दे दिया। अब इस बात की संभावना है कि पार्टी उन्हें क्लीन चिट दे देगी।

सूत्रों का कहना है कि संघ आगामी वक्त में प्रज्ञा ठाकुर का इस्तेमाल हिंदूवादी नेता के चेहरे के तौर पर करना चाहता है। इसलिए प्रज्ञा पर कोई कार्रवाई नहीं होंगी। प्रज्ञा के हिस्से में तीन महत्वपूर्ण बातें जाती हैं। एक तो उन्होंने भोपाल में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को हराया, दूसरा वह हिंदूवादी चेहरे के तौर पर पहचानी जाती हैं और तीसरा आने वाले समय में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका रहने वाली है।

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