सेंसर की मदद से बच्चों के रोने के पीछे छुपा संदेश पहचान लेगा यंत्र

छोटे शिशुओं के रोने को नजरअंदाज करना कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य रोना समझ लेते हैं, जबकि इसके पीछे की वजह कुछ और होती है। जब असली बात सामने आती है तो लगता है काश यह पहले ही समझ लिया होता। वैज्ञानिकों ने अब शिशुओं का बेहतर तरीके से ख्याल रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) युक्त एक नया टूल विकसित किया है जो बच्चों के रोने की असली वजह बताएगा। इसके माध्यम से पता चलेगा कि शिशु किसी बीमारी के कारण रो रहा है या सामान्य बात पर।

आइईईई/सीएए जर्नल ऑफ आटोमिना सिनिका (जेएएस) नामक पत्रिका में इस विधि को विस्तार से बताया गया है। इसमें बताया गया कि कुछ अनुभवी हेल्थकेयर वर्कर और अनुभवी माता-पिता शिशुओं की जरूरत का उसके रोने की आवाज से सटीक पता लगा लेते हैं, लेकिन यह सबके लिए इतना आसान नहीं होता। अमेरिका की नार्दर्न इलिनोइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि प्रत्येक शिशु के रोने का तरीका अलग होता है, लेकिन जब वह किसी तरह की बीमारी पर रोते हैं तो सबके रोने में कुछ न कुछ कॉमन होता है और उनके रोने में वही छुपा हुआ पैटर्न पहचान पाना ही सबसे बड़ा चैलेंज होता है। इसका पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया एआइ टूल बनाया है। इसमें बहुत बड़े डाटा का इस्तेमाल कर एक एल्गोरिद्म बनाई गई है। इसमें एक नई प्रकार की क्राई लैंग्वेज बनाई गई, जिसके माध्यम से सामान्य स्थित में रोने और असामान्य स्थिति में रोने का पता लगया जा सकता है। अलग-अलग बीमारियों के कारण शिशुओं के रोने में अलगअलग सिग्नल मिलते हैं। एआइ टूल के द्वारा इन्हें पहचाना जाता है और बीमारी का सही पता लगाया जाता है।

वैज्ञानिकों ने जो एआइ टूल बनाया है वह शोरगुल में भी बच्चे के रोने की आवाज सिग्नल के जरिये आसानी से पहचान लेगा। आमतौर पर कोलाहल में बच्चों की आवाज दब जाती है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक विशिष्ट एल्गोरिथ्म का उपयोग किया है जो शिशु के रोने पर स्वयं ही आवाज की विशेषताओं का पता लगाने में समक्ष है। उन संकेतों का विश्लेषण और वर्गीकरण करने के लिए कंप्रेस्ड सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो कम सिग्नल पर भी आवाज आसानी से पकड़ लेती है। यह तकनीक तब काम आती है जब आसपास शोरगुल ज्यादा हो रहा हो और सामान्य रूप से शिशु के रोने की आवाज सुनाई नहीं देती।

अमेरिका की नार्दर्न इलिनोइस यूनिवर्सिटी के लिचुआन लियू ने कहा कि एक विशेष भाषा की तरह, विभिन्न ध्वनियों में बहुत सारी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी होती है। इस टूल की विशेषता है कि वह ध्वनि संकेतों के बीच अंतर के आसानी से पहचान लेता है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य यही है कि बच्चे स्वस्थ्य रहें और माता-पिता पर उनकी देखभाल का बोझ थोड़ा कम हो सके। भविष्य में यह टूल बच्चों की देखभाल के लिए सबसे अच्छा, सुरक्षित और कारगर तरीका सिद्ध हो सकता है।

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