जानिए- कैसे देश भर में फैला है ‘रक्त चंदन’ का खुफिया जाल

आंध्र प्रदेश से लाल चंदन (रक्त चंदन) की लकड़ी लाकर गुरुग्राम के वेयरहाउसों में जमा की जाती हैं। यह वेयरहाउसों से कई बार लकड़ी बरामद होने से प्रमाणित हो चुका है। पालम एयरपोर्ट से एनसीआर के अन्य इलाकों के बजाय गुरुग्राम पहुंचना काफी आसान है। विदेशी ग्राहक खासकर चीनी ग्राहक आते हैं और कुछ देर के भीतर सौदा फाइनल करके लौट आते हैं।

जांच में यह भी पता चला है कि गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद एवं गाजियाबाद में भी लाल चंदन की लकड़ियां आंध्र से लाकर जमा की जाती हैं। सौदा होने के बाद सभी जगहों से मॉल उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल पहुंचाया जाता है। वहां से मॉल चीन भेज दिया जाता है।

गुरुग्राम के बिलासपुर स्थित एक वेयरहाउस में भारी मात्रा में लाल चंदन की लकड़ियों की बरामदगी से साफ है कि या तो गुरुग्राम पुलिस निष्क्रिय है या फिर कारोबारियों से मिलीभगत है। चार साल पहले दिल्ली पुलिस की टीम ने गुरुग्राम आकर छापेमारी की थी, जबकि कुछ ही दूरी पर बिलासपुर थाना है।

जानकारों के मुताबिक लाल चंदन की लकड़ियों की तस्करी आंध्र प्रदेश से होती है। वहीं से पूरे देश में या फिर विदेश तक लकड़ी पहुंचती है। इसके बाद तमिलनाडु से तस्करी होती है। वैसे कई देशों में इसकी मांग है, लेकिन सबसे अधिक मांग चीन में है। इसका इस्तेमाल वाद्ययंत्रों के निर्माण में किया जाता है।

गुरुग्राम में सैकड़ों की संख्या में वेयरहाउस हैं। अधिकतर वेयरहाउस बिलासपुर, पटौदी एवं फरुखनगर इलाके में हैं। कारोबारी आंध्र प्रदेश से लकड़ियां इस तरह लाते हैं कि उन्हें आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता। लकड़ियों के ऊपर भूसा डाल देते हैं या फिर बंद कंटेनर में मॉल लाते हैं। पकड़े तब जाते हैं जब कोई मुखबिर पीछे से लग जाए। कारोबारी वेयरहाउस किराये पर बुक कर लेते हैं।

वह क्या सामान रखते हैं वेयरहाउस संचालक को इससे नहीं बल्कि सिर्फ किराये से मतलब होता है। वह यह भी नहीं देखते कि जगह किस लिए ली जा रही है। वन विभाग से लेकर पुलिस भी नजर नहीं रखती। सवाल खड़ा होता है कि इसमें कहीं कुछ पुलिसकर्मी भी तो शामिल नहीं हैं। क्योंकि अब तक मुख्य तस्करों तक पुलिस किसी भी मामले में नहीं पहुंच सकी।

जानकार बताते हैं कि वेयरहाउसों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। इससे पता चलता रहेगा कि उसमें क्या-क्या सामान लाकर रखे जाता है। कई मामले सामने आ चुके हैं – वर्ष 2015 के दौरान गांव पथरेड़ी स्थित एक वेयरहाउस से 21 टन से अधिक लाल चंदन की लकड़ी बरामद की गई थी। उसकी कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये आंकी गई थी। मौके से लकड़ी काटने वाली कई मशीनें भी बरामद की गई थीं। उस समय गिरफ्तार किए ट्रक चालक ने स्वीकार किया था कि आंधप्रदेश से लकड़ी ट्रक से लाई गई थी।

किसी को शक न हो इसके लिए लकड़ियों के ऊपर भूसा रखा गया था। वर्ष 2017 के दौरान गोल्फ कोर्स रोड पर एक कैंटर से डेढ़ टन लाल चंदन की लकड़ी बरामद की गई थी। मौके से तमिलनाडु मूल के दो आरोपित भी गिरफ्तार किए गए थे। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया था कि वे तमिलनाडु से लकड़ी लेकर आए थे और इसे फरीदाबाद पहुंचना था। इसी तरह कई बार लाल चंदन की लकड़ी बरामद की जा चुकी है। पालम एयरपोर्ट नजदीक होने की वजह से ही गुरुग्राम में लाल चंदन आंध्रप्रदेश से लाकर जमा की जाती है। विदेशी ग्राहक गुरुग्राम में आकर सौदा करना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि उनका काम कम से कम समय में हो जाता है।

सुभाष यादव (महाप्रबंधक, हरियाणा वन विकास निगम) का कहना है कि 90 प्रतिशत से अधिक सप्लाई चीन को होती है। वेयरहाउसों में लाल चंदन जमा करने की शिकायत सामने आने पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि कुछ वर्ष से लाल चंदन वेयरहाउसों में जमा करने की शिकायत सामने नहीं आई है।

क्या है रक्त चंदन?
वन विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि रक्त चंदन एक अलग जाति का पेड़ है जिसकी लकड़ी लाल होती है लेकिन उसमे सफेद चंदन की तरह कोई महक नहीं होती। बता दें कि सफेद चंदन की तरह रक्त चंदन का इस्तेमाल ज्यादातर दवाएं या इत्र बनाने और हवन-पूजा के लिए नहीं होता। उधर, इससे महंगे फर्नीचर और सजावट के सामान बनते हैं और इसका प्राकृतिक रंग कॉस्मेटिक उत्पाद और शराब बनाने में भी इस्तेमाल होता है।  जानकर बताते है कि लाल चंदन की लकड़ी अन्य लकड़ियों से उलट पानी में तेजी से डूब जाती हैं क्योंकि इसका घनत्व पानी से ज़्यादा होता है, यही असली रक्त चंदन की पहचान होती है।

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