खगोलविदों ने जताई चिंता, अंतरिक्ष में सैटेलाइटों से तारों के छिपने का बढ़ रहा खतरा

दुनिया के हर हिस्से को इंटरनेट से जोड़ने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत स्पेसएक्स कई सारे सैटेलाइट लांच की तैयारी में है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए कंपनी ने पिछले महीने ने 60 सैटेलाइट लांच किए थे। विमान व रॉकेट बनाने वाली कंपनी स्पेस एक्स स्टारलिंक परियोजना के तहत हजारों सैटेलाइट और लांच करने वाली है। खगोलविदों ने इसपर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इनसे सितारों के ढक जाने का खतरा है जिससे वैज्ञानिक अध्ययन बाधित होंगे। यदि अंतरिक्ष में इनकी संख्या बढ़ती है तो कई सारे सितारों की बजाए ये सैटेलाइट ही आसमान में चमकते नजर आएंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस परियोजना का लक्ष्य बेहतरीन है लेकिन यह कई सारी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है।खगोलविद टायलर नॉर्डग्रेन ने कहा, ‘यह परियोजना आसमान की सूरत को ही बदल देगी क्योंकि ये सैटेलाइट बहुत ज्यादा चमकीले हैं।’

प्रत्येक सैटेलाइट में सोलर पैनल लगा है जो ना सिर्फ सूर्य के प्रकाश को इकट्ठा करता है बल्कि उसे धरती पर प्रतिबिंबित भी करता है। स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने कई बार दावा किया था कि ये सैटेलाइट सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केवल कुछ ही घंटे तक नजर आएंगी। खगोलिविदों ने रात में ली गई कई तस्वीरें जारी कर मस्क के सारे दावों का खंडन किया है। 60 सैटेलाइट के लांच के बाद ली गई शुरुआती तस्वीरों में कई सारे सैटेलाइट दिख रहे हैं जो ध्रुव तारे से भी ज्यादा चमकीले हैं।

हर दूसरी तस्वीर में दिखेगा सैटेलाइट

टेलीस्कोप से आसमान की तस्वीर उतारते वक्त यदि कोई सैटेलाइट उस क्षेत्र से गुजरता है तो तस्वीर पर एक धारी बन जाती है। इसके चलते खगोलविद को फिर से तस्वीर लेनी पड़ती है। यदि स्टारलिंक परियोजना लांच हो गई तो शाम ढलने के कुछ घंटे बाद हर दूसरी तस्वीर में कोई सैटेलाइट नजर आएगा।

कई अन्य कंपनियां भी लांच करेंगी सैटेलाइट

स्पेसएक्स के अलावा कई अन्य कंपनियां भी दुनियाभर में इंटरनेट पहुंचाने के लिए सैटेलाइट करने पर विचार कर रही हैं। इसमें अमेजन, टेलीसैट व वन वेब आदि शामिल हैं। इनकी परियोजनाओं के लांच होने के बाद कक्षा में सैटेलाइट की संख्या और भी बढ जाएगी।

खगोलविदों ने पहले भी उठाए थे सवाल

1990 में इरिडियम कम्युनिकेशन ने दुनियाभर में फोन कवरेज के लिए दर्जनों सैटेलाइट लांच किए थे। उस वक्त भी खगोलविदों ने सैटेलाइटों से तारों के ढकने की आशंका जाहिर की थी। हालांकि उस वक्त 66 सैटेलाइट ही लांच हुए थे और तकनीक भी बदल रही थी इसलिए यह बहुत बड़ी समस्या नहीं बना था।