शियामेन/नई दिल्ली. ब्रिक्स समिट से इतर मंगलवार को शियामेन में नरेंद्र मोदी और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की बाइलेट्रल मीटिंग हुई। सिक्किम के डोकलाम एरिया में गतिरोध के बाद दोनों लीडर पहली बार मिले। दोनों देशों में इस पर सहमति बनी कि सिक्युरिटी पर्सनल के बीच मजबूत कॉपरेशन रखा जाएगा, ताकि डोकलाम जैसे हालात दोबारा ना बनें। जिनपिंग ने कहा, “चीन पंचशील के 5 सिद्धांतों पर भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।” बाइलेट्रल मीटिंग में आतंकवाद और व्यापार पर भी बात हुई। बता दें कि भारत-चीन के बीच पंचशील समझौता 1954 में हुआ था, उस वक्त जवाहरलाल नेहरू भारत के पीएम थे। ये पीछे मुड़कर देखने का नहीं, आगे बढ़ने का वक्त है…
– जिनपिंग के साथ मीटिंग में मोदी ने कहा, “मैं ब्रिक्स समिट को कामयाबी से कराने के लिए आपको बधाई देता हूं।” जिनपिंग ने कहा, “भारत-चीन के बीच एक स्वस्थ और स्थिर संबंध ही दोनों देशों के हित में है। भारत-चीन एक-दूसरे के बड़े पड़ोसी हैं, हम दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से विकास करने वाले देश भी हैं।”
– बाद में इंडिया के फॉरेन सेक्रेटरी एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाइलेट्रल मीटिंग का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा, “बाइलेट्रल मीटिंग में आपसी भरोसा बढ़ाने पर बातचीत हुई। बॉर्डर पर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी है। शांति बनाए रखने के लिए बातचीत करते रहने पर रजामंदी बनी है। मतभेद को टकराव में नहीं बदलने देने की भी बात हुई। दोनों देश जानते हैं कि ये पीछे मुड़कर देखने का नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का वक्त है।”
आतंकवाद के खात्मे के लिए मिलकर कदम उठाने की जरूरत: मोदी
– मोदी ने मंगलवार को शियामेन में ‘डायलॉग ऑफ इमरजिंग मार्केट एंड डेवलपिंग कंट्रीज’ कॉन्फ्रेंस को भी एड्रेस किया। उन्होंने कहा, “आतंकवाद से मुकाबले के लिए मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में हमें एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।” कॉन्फ्रेंस में ब्रिक्स देशों के लीडर्स ने विकासशील देशों में बढ़ रहे मार्केट पर चर्चा की।
– मोदी ने कॉन्फ्रेंस में कहा, “अगला दशक ब्रिक्स देशों के लिए बेहद अहम है, हमारी विकास नीति का आधार सबका साथ सबका विकास है। दुनिया को हरा-भरा बनाने और क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के खतरे को कम करने के लिए भी एक साथ काम करने की जरूरत है।