जानिए- क्यों होगा दिल्ली के 35 अस्पतालों का होगा निरीक्षण, HC ने सुनाया फरमान

 दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक सुविधाओं, डॉक्टरों व दवाओं की समस्या के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने 35 सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पूर्व प्रधान सचिव डीएस नेगी के नेतृत्व में विशेषज्ञ कमेटी गठित की है। पीठ ने कमेटी को सभी अस्पतालों का निरीक्षण कर चार माह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

मुख्य पीठ ने कहा कि अगर चार माह में पूरी रिपोर्ट देना संभव न हो तो प्राथमिक रिपोर्ट अदालत में जरूर पेश करें। कमेटी के कार्य की समीक्षा 28 अगस्त को होगी। मुख्य पीठ ने दोनों पक्षों की तरफ से समिति के लिए सुझाए गए नामों में से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डीएस नेगी समेत सात लोगों की विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। डीएस नेगी को कमेटी का संरक्षक बनाया है। उनके अलावा कमेटी में जीबी पंत अस्पताल की पूर्व निदेशक डॉ. वीना चौधरी, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की निदेशक प्रोफेसर डॉ. संगीता गुप्ता, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद तारिक, दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर मीनू आनंद, दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रधान सचिव (सेवा) को शामिल किया गया है। पीठ ने विशेषज्ञ कमेटी के कार्य में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा को मदद करने के निर्देश दिए हैं।

कमेटी का सहयोग करे दिल्ली सरकार व अस्पताल
मुख्य पीठ ने दिल्ली सरकार व सभी अस्पतालों के प्रशासन को निर्देश दिया कि वे विशेषज्ञ कमेटी के निरीक्षण के दौरान सहयोग करें। उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराएं और अस्पताल का मौका-मुआयना कराएं। पीठ ने साथ ही सेवारत दो सरकारी अधिकारियों को छोड़कर समिति के अन्य पांच सदस्यों को दो-दो लाख रुपये वेतन के रूप में भुगतान का दिल्ली सरकार को निर्देश दिया।

इन अस्पतालों समेत 35 का होगा निरीक्षण
जीबी पंत अस्पताल, लोकनायक अस्पताल, जीटीबी अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलिरी साइंसेस (आइएलबीएस), बाबा साहेब अम्बेडकर अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस समेत 35 अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा।

यह है मामला
नौ महीने की गर्भवती मधुबाला के बच्चे की मौत जीटीबी अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही हो गई थी। अस्पताल की लापरवाही के कारण तीन दिन तक मृत बच्चा उनके पेट में ही रहा और उनकी जान को भी खतरा हो गया। हालांकि, वह बच गई। इसके बाद मधुबाला ने अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा के माध्यम से जीटीबी अस्पताल समेत पांच बड़े सरकारी अस्पताल के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी।

बेहाल है अस्पतालों का हाल
अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने बेहाल अस्पतालों पर स्थिति रिपोर्ट पेश की थी। उन्होंने पीठ को बताया था कि 35 सरकारी अस्पतालों में एनुअल मेंटीनेंस कान्ट्रैक्ट (एएमसी), कॉम्प्रीहेंसिव मेंटीनेंस कान्ट्रैक्ट (सीएमसी) उपलब्ध नहीं हैं। फर्जी कंपनियों के द्वारा उपकरण की खरीद होती है और इसके कारण एएमसी व सीएमसी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 1996 से नियमित पद नहीं निकाला गया, ऐसे में मेडिकल सुपरिटेंडेंट से लेकर अन्य पदों पर संविदा पर भर्ती के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसके बाद पीठ ने सभी 35 अस्पतालों को इसमें शामिल किया था।

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