67 ट्रेनों के ठहराव में हो सकता है बदलाव

लोकसभा चुनाव से पहले ट्रेनों के दिए गए अतिरिक्त ठहराव पर खतरा मंडराने लगा है। रेल प्रशासन अपने पूर्व निर्णय की समीक्षा करेगा, जो ठहराव व्यवसायिक रूप से फायदेमंद नहीं होंगे, उसे समाप्त किया जाएगा। उत्तर रेलवे ने दिल्ली सहित अपने सभी रेल मंडलों को 67 ट्रेनों की सूची देकर इनके नए ठहराव की समीक्षा करने को कहा है।

अक्सर यात्रियों की मांग को ध्यान में रखकर किसी स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव दिया जाता है। वहीं, कई बार राजनीतिक लाभ के लिए भी सांसद व अन्य नेता अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपने क्षेत्र के स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव दिलाने में सफल रहते हैं।

इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच उत्तर रेलवे ने ट्रेनों के 200 के करीब ठहराव बढ़ाए हैं, जिसका असर रेल परिचालन पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन का ठहराव बढ़ाने से कुछ यात्रियों को तो राहत मिल जाती है, लेकिन इसका असर टाइम टेबल पर पड़ता है। वहीं, ट्रेन की रफ्तार भी धीमी हो जाती है, जिससे वह अपने गंतव्य पर विलंब से पहुंचती हैं।

इसे ध्यान में रखकर पिछले पांच वर्षों में जिन ट्रेनों के ठहराव बढ़ाए गए हैं उनकी समीक्षा की जाएगी। फायदेमंद साबित नहीं होने वाले ठहराव को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अपने स्तर पर समाप्त कर सकेंगे। चुनाव से पहले दिल्ली कैंट पर उदयपुर-हरिद्वार एक्सप्रेस और गोकुलपुरी सबोली हॉल्ट पर सहारनपुर पैसेंजर का ठहराव शुरू किया गया था।

उत्तर रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली, अंबाला, फिरोजपुर, मुरादाबाद, लखनऊ रेल मंडलों को 22 मई को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। जल्द ही समीक्षा करके रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसी के अनुसार कोई फैसला होगा।