यहां के रहस्यमय नजारों में खो जाते हैं सैलानी, सबसे खूबसूरत हैं यहां के पहाड़

नई दिल्ली। मैदानों पर पड़ रही भीषण गर्मी से बचने के लिए अक्सर लोग पहाड़ों का रुख करते हैं। अगर आप भी ऐसा कोई प्लान बना रहे हैं तो हिमाचल आपके लिए सबसे उपयुक्त जगह हो सकती है। हिमाचल को देवताओं की तपोस्थली भी कहा गया है। इसे ये नाम ऐसे ही नहीं मिला है। पहाड़ के सुंदर स्थलों पर स्थित कई ऐसे तपस्थल हैं, जहां देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने तप किया है।

इन तपोस्थलियों का इतिहास भी चमत्कारिक है। इन मनमोहक स्थलों पर पहुंचना जितना मुश्किल है, उतनी ही आत्मीय संतुष्टि यहां पहुंचकर होती है। कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में लगभग 18,300 फुट की ऊंचाई पर स्थित है, प्रसिद्ध श्रीखंड महादेव मंदिर। अति दुर्गम रास्ते के कारण यहां तक पहुंचने की यात्रा श्री अमरनाथ की यात्रा से भी कठिन मानी जाती है। आइए जानें इन रहस्यमय और चमत्कारिक धार्मिक स्थलों के बारे में…।

श्रीखंड महादेव 
हिमाचल को देवताओं की तपस्थली भी कहा गया है। कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में लगभग 18,300 फुट की ऊंचाई पर स्थित है प्रसिद्ध श्रीखंड महादेव मंदिर। दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड यात्रा विश्व पटल पर उभर रही है। श्रीखंड महादेव की यात्रा शिव भक्तों के लिए प्राचीन काल से ही आकर्षण का कारण रही है। करीब चार दिन की इस यात्रा के अंतिम पड़ाव के बाद श्रद्धालुओं को सीधी नुकीली चढ़ाई चढऩे के बाद महादेव के दर्शन होते हैं। मणिमहेश, किन्नर कैलाश और मानसरोवर की तरह ही इस यात्रा को भी एक चुनौती भरी धार्मिक एवं  पवित्र यात्रा का दर्जा प्राप्त है।

पराशर झील 
पराशर झील मंडी शहर की उत्तर दिशा में ऊंची पहाड़ी पर लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित प्राकृतिक झील है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण और अधिक प्रचारित न होने के कारण यहां अधिक लोग नहीं जाते हैं। वैसे यहां वर्षभर आया जा सकता है। पराशर झील और उसमें तैरता भूखंड ताथा पराशर ऋषि का मंदिर यहां की प्राचीन धरोहर है।यहां मंडी शहर से बागी और फिर आठ किलोमीटर की ट्रेकिंग कर पहुंचा जा सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त झील में तैरता भूखंड एक आश्चर्य है। झील में तैर रही पृथ्वी के इस बेड़े को स्थानीय भाषा में टाहला कहते हैं। झील के किनारे 13वीं शताब्दी में पैगोडा शैली में निर्मित आकर्षक मंदिर है।

बिजली महादेव
भगवान शिव के भारतवर्ष में अनेक अद्भुत मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित बिजली महादेव। मंदिर पर हर बारह साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं। कुछ ही माह बाद शिवलिंग एक ठोस रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।

ज्वाला देवी मंदिर
ज्वाला देवी मंदिर, कांगडा घाटी से 30 कि॰मी॰ दक्षिण में हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में शामिल है। ज्वाला देवी मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। ज्वाला देवी मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवो को जाता है। उन्हीं के द्वारा इस पवित्र धार्मिक स्थल की खोज हुई थी। इस स्थल पर माता सती की जीभ गिरी थी। इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है।

कमरूनाग झील
कमरूनाग झील मंडी शहर से 51 किलोमीटर दूर करसोग घाटी में समुद्र के तल से लगभग नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। देवदार के घने जंगलों से घिरी यह झील प्रकृति प्रेमियों को अभिभूत कर देती है। इस झील में अरबों का खजाना होने का अनुमान है। यह खजाना किसी ने छिपाया नहीं है, बल्कि लोगों ने ही आस्थावश यहां सोने-चांदी के आभूषण आदि झील के हवाले कर दिए।

शिकारी देवी
शिकारी देवी का मंदिर हिमाचल के मंडी जिला में 2850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर आज भी लोगों के लिए बहुत ही रहस्य का विषय बना हुआ है। क्योंकि आज तक सैकड़ों कोशिशों के बाद भी इस रहस्यमई मंदिर की छत नहीं बन पायी। यहां हर साल बर्फ तो खूब गिरती है मगर मां के स्थान पर कभी भी बर्फ नहीं टिकती है। यह एक अद्भुत चमत्कार जैसा लगता है। मार्कण्डेय ऋषि ने यहां सालों तक तपस्या की थी। पांडवों की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने उन्हें कौरवों के खिलाफ युद्ध में जीत का आशीर्वाद यहीं दिया था।

आदि हिमानी चामुंडा
आदि हिमानी चामुंडा मंदिर लगभग 344 साल पुराना है। यहां पहुंचने के लिए श्री चामुंडा देवी मंदिर (कांगड़ा) से दुर्गम ट्रैकिंग रूट से पहुंचा जाता है। अब यहां हेलीटेक्सी सेवा भी शुरू हो गई। यहां पहुंचने का रास्ता जितना दुर्गम है उतना ही रमणीय भी है। ऊंचे पहाड़ों से कांगड़ा और पालमपुर घाटियों का नजारा देखते ही बनता है।

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