04 जून: करवीर व्रत।

07 जून: विनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत।

09 जून: भानु सप्तमी पर्व।

10 जून: दुर्गाष्टमी व्रत।

निर्झरिणी

क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से अपने हाथ में पकड़े रहने के समान है। इससे आप ही जलते हैं। – महात्मा बुद्ध

सनातन है आत्मा

यर्थाथ गीता: अच्छेद्योयमदाह्योयमक्लेद्योशोष्य एव च। नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोयं सनातन:।।

यह आत्मा अच्छेद्य है-इसे छेदा नहीं जा सकता है। यह अदाह्य है-इसे जलाया नहीं जा सकता है। यह क्लेद्य है-इसे गीला नहीं किया जा सकता। आकाश इसे अपने में समाहित नहीं कर सकता। यह आत्मा नि:संदेह अशोष्य, सर्वव्यापक, अचल, स्थिर रहनेवाली और सनातन है। श्रीकृष्ण ने आजत्मा को ही सनातन बताया। यदि आप आत्मपर्यन्त दूरी तय करानेवाली विधि विशेष से अवगत नहीं हैं, तो आप सनातन धर्म नहीं जानते।

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com