नगर में निकला झाकियों का कारवा सार्वजनिक गणेश उत्सव एवं दशहरा उत्सव समिति के नेत्रत्व में निकली झाकिया

नगर में निकला झाकियों का कारवा

सार्वजनिक गणेश उत्सव एवं दशहरा उत्सव समिति के नेत्रत्व में निकली झाकिया  

बड़वाह -सार्वजनिक गणेश उत्सव एवं दशहरा उत्सव समिति  के तत्वाधान में मंगलवार को 68 वा वर्ष में अनंत चतुर्थी पर झिलमिलाती धार्मिक द्र्श्यो से सजी झांकिया नगर में निकाली गई | यह झांकियो का कारवा रात्रि 8 बजे अखाडो और डंडा पार्टी के साथ केंद्रीय ओधोगिक सुरक्षा बल कालंका माता रोड परिसर से निकला| जो देर रात्रि तक नगर के मुख्य मार्ग झंडा चोक ,एमजी रोड, मेन चोराहा ,जय स्तम्भ पर पहुचा |

झाकिया रही आकर्षण का केंद्र

 सार्वजनिक गणेश उत्सव एवं दशहरा उत्सव समिति द्वारा अनंत चतुर्थी पर समुद्र मंथन ,राम दरबार ,श्री कृष्ण सुदामा ,गणेश प्रतिमा जैसी अद्भुभुत धार्मिक झाकियों का कारवा निकाला गया |झाकियों में लगी विधुत्त सज्जा से झाकियों का आकर्षण केंद्र दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रो से आये श्रधालुओ के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा |जो देर रात्रि तक चलता रहा | इस दौरान नगर में झांकिया निकले के पूर्व परिवारजनों के सदस्यों ने अपने बच्चो को बाजार में भ्रमण करवाया |इस दोरान बाहरी क्षेत्रो से आये विभिन्न दुकानदारो ने कई स्थानों पर खिलोनो एवं अन्य सामग्री की दुकाने ओटलो पर लगाई |

व्यवस्थाओ के लिए लगाया अतिरिक्त बल

 थाना एसआई बलवीर सिह यादव ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक डी.के कल्याण चक्रवर्ती के द्वारा सार्वजनिक गणेश विसर्जन एवं अनंत चतुर्थी पर्व की व्यवस्था को देखते हुए इंदौर पुलिस लाइन से 10 जवान भेजे है |इन जवानो को नगर के मुख्य मार्गो पर तेनात किया गया |झाकियों का काफिला निकलने के दोरान इंदौर ईचछापुर हाईवे पर यातायात सुचारू रखने के लिए इंदौर नाके सहित खंडवा नाके पर पुलिस जवान तेनात किये |इसके अलावा रात्री में नगर से निकलने वाली झाकियों में असामाजिक तत्वों पर पुलिस बल द्वारा नजर रखने हेतु भ्रमण भी किया |

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कभी भी मित्रता में पद और प्रतिष्ठा नही आये आड़े

बडवाह – सत्ती घाटा स्थित राधा कृष्ण मन्दिर मे गादीपति महंत बलजीत जी भारती महाराज के सानिध्य में हो रही श्रीमद भागवत कथा के सातवे दिवस व्यास पीठ पर आसीन कथा वाचन पंडित प्रदीप अत्रे द्वारा कृष्ण सुदामा की कथा के मार्मिक प्रसंग का वाचन किया |जिसे सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं । उन्होंने वाचन में कहा कि इस कथा से यह संदेश मिलता है कि कभी भी मित्रता में पद और प्रतिष्ठा आड़े नहीं आना चाहिए। इससे तात्पर्य है कि मित्रता में एक दूसरे का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। सत्ता पाकर व्यक्ति को घमंड नहीं करना चाहिए। बल्कि उसे श्रीकृष्ण जैसा विनम्रता एवं उदारता का आचरण अपनाना चाहिए । जो इंसान श्रीकृष्ण के जैसा आचरण अपना लेता है। वह संसार के मोह माया से पूरी तरह त्याग कर देता है। इस दोरान सुदामा और श्रीकृष्णके मिलाप का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया गया।कथा के अंतिम दिन भक्त गणो को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज भले ही कथा का अंतिम दिन हैं लेकिन वास्तविकता मे धर्म की कोई भी कथा कभी समाप्त नही होती। कथा विराम लेती है और फिर से शुरू हो जाती है।

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