रांची के चने वाले की सुनिए, ए मही, जीत के आना

रांची। रांची का कॉलेज ग्राउंड। झारखंड की राजधानी के बीचों बीच। ये वही ग्राउंड है जहां महेन्द्र सिंह धौनी ने जमकर छक्के लगाए हैं। वो पानी की टंकी भी यहीं है और वो फ्लैट्स भी ग्राउंड के बाहर, जहां छक्के पड़ने पर बॉल अटक जाया करती थी।

ग्राउंड के किनारे पर एक ठेला लगा है। चने का ठेला। जिसे देख उत्सुक्ता होती है कहीं ये माही के चने वाले महेन्द्र जी तो नहीं। दूर से ही महेन्द्र जी को नमस्कार किया जाता है तो वो खुश होते हैं। वो हमें जानते नहीं हैं, लेकिन हाथ में माइक देख समझ जाते हैं कि मीडिया से हैं। ये कोई महेन्द्रजी को सौवां इंटरव्यू होगा। हो भी क्यों न, महेन्द्र जी चने वाले रांची में किसी सेलीब्रेटी से कम नहीं। महेन्द्र सिंह धोनी को बचपन से चना खिलाते आ रहे हैं, कम बात थोड़े ही है।

तीन दशक से ज्यादा हो गए जब महेन्द्रजी रांची में चने का ठेला लगाते हैं। इधर उधर नहीं जाते, स्पोर्ट्स ग्राउंड के इर्द गिर्द ही रहते हैं। चने वाले महेन्द्रजी बताते हैं कि शुरुआती दिनों में पाकिस्तान से जीत के आने के बाद जब धौनी रांची लौटे तो प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड आए थे। माही के साथ उनके दोस्त संतोष लाल भी थे, वही संतोष जिन्होंने धौनी को हेलीकॉप्टर शॉट लगाना सिखाया था। उस वक्त धौनी ने महेन्द्रजी के ठेले से चना खिलाया। उसके बाद अखबारों ये छप गया कि बिना पैसा दिए धौनी चना खा गए। ऑस्ट्रेलिया जीतने के बाद जब धौनी फिर रांची आए तो स्टेडियम जाते वक्त रास्ते में महेन्द्रजी का ठेला देख रुके, और कुछ पैसे देने लगे। महेन्द्रजी ने इनकार किया तो ठेले पर ही रख कर चले गए। उनके साथ प्रोटोकॉल में लगे पुलिस वालों ने जब नोट गिने तो वो पैंतीस हजार रुपए थे।

अब जब टीम इंडिया इंग्लैंड में वर्ल्ड कप 2019 खेल रही है तो महेन्द्रजी चने वाले का कहना है-”हम कहना चाहते हैं कि टीम इंडिया ही वर्ल्ड कप जीतेगी। धौनी सुन लो, जीत के आना, हम चना खिलाएंगे।”

HAMARA METRO

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