बीपी मरीन अकॉडमी के मालिक बादल सिंह पर डकैती एवम दहेजउत्पीड़न का मामला दर्ज

बीपी मरीन अकॉडमी के मालिक बादल सिंह पर डकैती एवम दहेजउत्पीड़न का मामला दर्ज

■ विगत कई वर्षों से फरयादी भावना सिंह के साथ उनके पति बादल सिंह करता रहा शारिरिक एवम लैंगिक अत्याचार , स्थानीय वाशी पोलीस पैसों के चौखट पर तोड़ा दम कार्यवाही के नाम शुन्य बटा सन्नाटा
■ प्रसिध्द मरीन अकॉडमी के डायरेक्टर्स बादल सिंग दहेज उत्पीड़न एवम डकैती के आरोप में  जा सकते है जेल 
■ भावना सिंह ने पूरे परिवार पर लगाये गंभीर आरोप, र्कोट के आदेश के बाद हुई दर्ज एफ आय आर
■ बीपी मरीन अकॉडमी के मालिक बादल सिंह अपनी ही पत्नी के साथ बहशीपन की सारी हदें की पर ,वाशी पोलीस प्रशासन पूर्णतया मूकदर्शक बना रहा , उक्त मामले में क्या वाशी पोलीस प्रशासन की कुम्भकरणी नींद टूटेगी यह भी एक यक्ष प्रश्न होगा ।
■ फिरयादी भावना सिंह पर बीपी मरीन अकॉडमी के मालिक बादल सिंह द्वारा गंभीरस्वरूप से अत्याचार की जाने की रिपोर्ट एफआईआर लिखने में एक साल से ज्यादा का वक्त लगा ,अगर इस प्रकार से महिलाओं का शोषण समाज मे होता रहेगा तो वह दिन दूर नही जब देश की हर महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस करेगी ।
चन्द्र भूषण मिश्र 
हमारा मैट्रो , मुम्बई 
“यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्त्रे तत्र देवता”  की संस्कृति परंपरा के देश भारत जहाँ यह माना जाता है कि जहाँ नारियों की पूजा मानसम्मान होता है वहां देवता निश्चितरूप से निवास करते हैं उसी वीर भूमि पर आज एक महिला अपने मानसम्मान , व हक्क की लड़ाई लड़ रही है जिसमे रक्षक ही भक्षक की भूमिका में परिलक्षित हो रहे हैं यह हमारे समाज एवम पोलीस प्रशासन के लिए बहुत शर्मनाक बात है  इसी क्रम में एक मामला नवी मुम्बई वाशी पोलीस ठाणे के अंतर्गत का है ।
विदित हो कि नवी मुम्बई के प्रसिध्द मरीन अकॉडमी के डायरेक्टर्स बादल सिंग, रामचंद्र तारकेश्वर सिंग, राजकुमारी सिंग इन पर वाशी पुलिस ने माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भादवि की धारा 324, 326, 342, 351, 379, 390, 392, 498ए, व 506 के तहत एफआईआर दर्ज की है किन्तु गिरफ्तारी अभी तक शून्य है । मामला बादल रामचन्द्र सिंह की पत्नी भावना सिंह ने दर्ज करवायी है. उपरोक्त मामले में गंभीर स्वरूप से यौन उत्पीड़न, शारीरिक मारपीट ,अपहरण एवं डकैती जैसी गम्भीर धाराओं में मामला दर्ज है फिर भी पोलीस मामले में सक्रियता नही दिखा रही है।
भावना सिंह स्वयं एक फिजीयो थिरेपिस्ट है, उनका कहना है कि उनको अपने ससुराल के घर में कैद कर के रखा जाता था, उनके साथ जानवरों की तरह व्यवहार किया जाता था फरवरी 2018 से अप्रैल 2018 तक काफी बूरी तरह मारपीट का सामना करना पडा, उनके पति बादल रामचन्द्र सिंह , उनके ससुर रामचन्द्र सिंह , उनकी सास राजकुमारी सिंह  तीनो अपराधियों ने मिलकर उनके स्त्रीधन पर भी जबरदस्तीपूर्वक अपने कब्जे में लिया है. पीड़िता भावना सिंह ने 8 अप्रैल 2018 को  वाशी पुलिस ठाणे एवं नवी मुम्बई पोलीस आयुक्त को इस बारे में लिखित शिकायत किया था, मगर स्थानीय वाशी पुलिस ने किसी भी प्रकार की उचित प्रशासनिक कार्यवाही  नहीं की उल्टा फरयादी को ही झूंटे केस में फंसाने की धमकी दी गयी अन्ततः उन्हें एक झूठे मामले में फंसा भी दिया गया ।
उन्होने यह भी आरोप लगाया की बीपी मरी अकॉडमी एक बड़े रसूक व मोटे पैसे वाली कम्पनी है, एवं उनको काफी पॉलिटीकल एवम आधिकारिक प्रभाव नवी मुम्बई में है इस कारण उनके ऊपर हो जुल्म व अत्याचार के विरुद्ध कोई मदद नही कर रहा है जिस वजह से उनको न्याय नही मिल पा रहा है ।
भावना सिंह ने यह भी बताया की बादल सिंह ने उन्हे काफी सुनियोजित तरीके से उन्हें बदनाम करने गलत आरोप लगाने की कोशिस भी की है यहाँ तक कि हमे जबरन आत्महत्या करने को मजबूर किया गया । यहाँ तक कि फर्जी सुसाइड नोट भी बनाये गए हैं अगर पोलीस निष्पक्षता से जांच करे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा । इसी क्रम में मैं विगत एक साल से मार लात घुसा खाती तड़पती रही प्रशासनिक कार्यालयों , महिला आयोग , चाइल्ड हेल्पलाइन , पोलीस आयुक्त , स्थानीय पोलीस के समक्ष गुहार लगा चक्कर काटती रही किन्तु इस अबला महिला की किसी ने सुनी अंततोगत्वा मुझे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी । न्यायालय ने सारे कागजात देखने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है की इस मामले में बादल सिंह एवं उनकी मां एवं पिता ने मिलकर भावना सिंह को मारने की कोशिस की गई एवं गंभीर स्वरुप से उनको मारा पिटा गया एवं साथ ही उनके लग भग 20 लाख रुपयों से ज्यादा के दगीना को भी तीनो ने मिलकर लूटपाट किया है।हालांकि आरोपियों की पकड पुलिस पर काफी मजबूत है क्योंकि बादल सिंह नवी मुंबई का एक बड़ा रईस व्यक्ति है पोलीस प्रशासन भी उसपर हाथ डालने के लिए सौ बार सोचता है । फिलहाल मुझे मौजूदा कमिश्नर से हमें आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि वो हमारी मदद अवश्य करेंगे एवं आरोपियों को उनके किये की सजा दिलाने हेतु उचित प्रशासनिक कार्यवाही अवश्य करेंगे।
 फरयादी के एडवोकेट श्री विनोद गंगवाल ने कहा है कि महिला उत्पीड़न के इतने  गम्भीर मामले में नवी मुंबई पोलीस प्रशासन की भूमिका पूरी तरह से निष्क्रिय एवम गैरजिम्मेदाराना रही , इसमें सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि उक्त मामले में उचित कायदेशीर कार्यवाही के लिए फरयादी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी लगभग एक साल के बाद आरोपियों पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है  तो एक आम आदमी के  फिरयाद पर पोलीस क्या मदद करेगी व आम आदमी पोलीस प्रशासन से किस प्रकार से न्याय की उम्मीद करेगा । गंगवाल ने कहा कि अभी सबसे बड़ा विषय यह है कि मामला दर्ज होने के बाद भी नवी मुंबई पोलीस  कुम्भकरणी नींद से कब जागेगी एवम कब तक आरोपियों को सरंक्षण देती रहेगी या फिर कानूनी दायरे में आकर गिरफ्तार करेगी ।
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