प्लास्टिक प्रदुषण समुद्रु में फैला रहा है जहरीला रसायन

प्लास्टिक प्रदूषण से निकलने वाले रसायन समुद्र में मौजूद उन बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जो दस फीसद तक ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं। प्लास्टिक प्रदूषण से उत्सर्जित रसायनों के संपर्क में आने से इन सूक्ष्म जीवों का विकास अवरुद्ध हो रहा है, जीन चक्र प्रभावित हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मैक्वेरी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने एक अध्ययन में यह दावा किया है। यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया गया है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निकलने वाले रसायन हमारे महासागरों, प्रकाश संश्लेषक (सूर्य के प्रकाश में भोजन बनाने वाले) समुद्री जीवों के जीवन पर क्या प्रभाव डालते हैं।

कम्युनिकेशन बायोलॉजी नामक पत्रिका में छपे शोध की मुख्य लेखिका साशा तेतू ने कहा, ‘अध्ययन में हमने पाया कि प्लास्टिक प्रदूषण से निकलने वाले रसायनों के संपर्क में आने से बैक्टीरिया के समूहों (प्रोक्लोरोकोकस) का विकास प्रभावित हुआ है, जिससे ऑक्सीजन के उत्पादन में कमी आ रही है। तेतू के मुताबिक, यह बैक्टीरिया महासागर में सबसे ज्यादा प्रकाश संश्लेषक माने जाते हैं।’

उन्होंने कहा कि अब हम यह पता लगाना चाहते हैं कि क्या प्लास्टिक प्रदूषण का इन समुद्री जीवों पर भी समान प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में शोध टीम ने समुद्र में अलग-अलग गहराई पर पाए जाने वाले प्रोक्लोरोकोकस में सामान्य प्लास्टिक उत्पादों से निकलने वाले रसायनों के प्रभावों को उजागर किया है। विश्वविद्यालय के शोधार्थी लोर मूर ने कहा कि यह प्रदूषण समुद्री वातावरण में रिस कर विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों को ढक सकता है, लेकिन इसके कारण प्लास्टिक के मलबे में फंसने वाले जानवरों का खतरा अपेक्षाकृत कम हो गया है।

बेहद अहम है यह सूक्ष्म जीव
ये छोटे सूक्ष्मजीव समुद्री फूड चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। कार्बन साइकिलिंग में योगदान के साथ ही ये जीव कुल वैश्विक ऑक्सीजन का 10 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। इसका मतलब है कि दस में से एक सांस के लिए इन सूक्ष्म जीवों का शुक्रिया किया जाना चाहिए, लेकिन मानव प्रदूषकों के कारण इस बैक्टीरिया को कितना नुकसान पहुंच रहा है।

क्या है प्रोक्लोरोकोकस बैक्टीरिया
हरे रंग के सूक्ष्म बैक्टीरिया के समूह को प्रोक्लोरोकोकस कहा जाता है। यह सबसे ज्यादा प्रकाश संश्लेषक जीव है। प्रकाश संश्लेषण के जरिये ये जीव समुद्र में कार्बोहाइड्रेट व ऑक्सीजन उत्पादित करते हैं।

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