जापान के सम्राट अकिहितो ने दुनिया की सबसे पुरानी वंशानुगत राजशाही को तोड़ा

जापान के 85 वर्षीय सम्राट अकिहितो का जन्म ईश्‍वर के एक पुत्र के रूप में हुआ, लेकिन वह लोगों के सम्राट के रूप में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। मंगलवार को सम्राट अकिहितो ने सिंहासन को त्‍याग दिया। यहां पर दुनिया की सबसे पुरानी वंशानुगत राजशाही है। ऐसा करने वाले आधुनिक इतिहास में पहले जापानी सम्राट बन गए। 59 वर्षीय उनके बेटे क्राउन प्रिंस नरहितो अगले दिन 126 वें सम्राट के रूप में सत्‍ता ग्रहण करेंगे।

लोगों को प्यार करने वाले सम्राट अकिहितो को उनकी जनता से जुड़ने के लिए याद किया जाएगा, जैसाकि किसी अन्य जापानी सम्राट ने नहीं किया। उन्‍होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देश के कार्यों के लिए “गहरा पश्‍चाताप” व्यक्त किया है।           स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद त्‍यागा
हाल के वर्षों में हार्ट सर्जरी और प्रोस्टेट कैंसर पर काबू पाने के बाद सम्राट अकिहितो ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद त्‍याग दिया। तीन दशकों में अपने दूसरे टीवी भाषण में मृदुभाषी सम्राट ने कहा कि मुझे चिंता है कि राज्य के प्रतीक के रूप में अपने कर्तव्यों को निभाना मेरे लिए कठिन हो गया है, जैसा कि मैंने अब तक किया है। इसे जापान के सांसदों की दलील के रूप में देखा गया ताकि वह कानून को बदलकर उन्‍हें सेवानिवृत्त होने की अनुमति दें। अगले वर्ष उन्होंने ऐसा ही किया।

मिशिगन विश्‍वविद्यालय में जापानी अध्‍ययन के इतिहासकार हितोमी तोनोमूरा ने कहा कि इस कदम ने लोगों का ध्यान और सम्मान जीत लिया, जिन्होंने वास्तव में सम्राट की अपनी इच्छा को माना। यह सम्राट के लिए उपयुक्त अंतिम कदम था जो अक्सर परंपरा से टूट गया। वह पहले जापानी सम्राट थे जिन्होंने एक सामान्‍य महिला से शादी की। टेलीविजन पर लाइव अपने विषयों पर बात की। उन्‍होंने अपने बच्चों की परवरिश में हाथ बंटाया।

सम्राट का जन्‍म 1933 में हुआ, यह समय जापान के लिए सबसे कठिन समय था। इस समय युद्ध चल रहा था। उनके पिता सम्राट हिरोहितो एक मानवीय देवता के रूप में प्रतिष्ठित हुए थे।

1937 में जापानी सैनिकों ने नानजिंग पर और फिर चीन गणराज्य की राजधानी पर हमला किया। चीनी अनुमानों के अनुसार जापानियों के कब्जे के बाद एक सप्ताह में लगभग तीन लाख चीनी मारे गए। जापान के बड़े पैमाने पर नरसंहार के बाद दुनिया भर में विवाद पैदा हुआ। 1940 में जापान आधिकारिक रूप से द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश किया। वह इस युद्ध के दौरान इटली और जर्मनी के पक्ष में शामिल हुआ। राष्ट्र के इतिहास में युद्ध के ये वर्ष विवादास्पद अवधि बन गई।

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों ने दो लाख कोरियाई महिलाओं को सेक्‍स दास बनने के लिए मजबूर किया। बाद में जापान ने माफी मांगी और कहा कि इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है, लेकिन दक्षिण कोरिया ने अधिक औपचारिक माफी और पुनर्मूल्यांकन की मांग की। 1945 में जब सम्राट हिरोहितो ने एक रेडियो संबोधन में सरेंडर किया था, तब ज्यादातर जापानी लोगों ने उनकी आवाज इससे पहले पहले कभी नहीं सुनी थी।

इसके बावजूद लगभग 20 साल तक वह सत्ता में रहे। युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान पर कब्जा कर लिया। नए संविधान ने शाही परिवार को राजनीति में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया और सम्राट हिरोहितो ने ईश्‍वरीय स्थिति को त्याग दिया। इसके बाद सम्राट ईश्‍वर के तुल्‍य नहीं रहे, वे सामान्‍य मनुष्‍य के तुल्‍य रहे।