दिल्ली अध्यापक परिषद ने आयोजित किया कर्तव्यबोध  कार्यक्रम

दिल्ली अध्यापक परिषद ने आयोजित किया कर्तव्यबोध  कार्यक्रम

नीरज पाण्डेय पूर्वी दिल्ली। वर्तमान काल में शिक्षक की स्तिथि हम से छुपी नहीं है, ऎसी अवस्था में शिक्षा का उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है ताकि वे राष्ट्र के संस्कारवान नागरिक बन सकें I समाज में शिक्षक की जीवन शैली भी भौतिकवाद से प्रभावित है, शिक्षक भी अपनी सीमित सोच के कारण दायित्व बोध के स्थान पर अपनी नौकरी की सुरक्षा और वेतन से सरोकार रखने वाले बन चुके हैं , इस चिंतनीय वातावरण में दिल्ली अध्यापक परिषद् के पूर्वी जिला ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वाधान में दिनांक 28 -01 -2018 को डी पी एम आई न्यू अशोक नगर के सभागार में कर्तव्य बोध दिवस कार्यक्रम आयोजित कर के सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने का प्रयास किया I
कार्यक्रम का मंच सफल संचालन संजय तिवारी ने किया, कार्यक्रम  की शुरुआत में संगठन का परिचय अवधेश पराशर जी, संगठन मंत्री,राजकीय निकाय ने कराया और बताया की यह संगठन 1971 से राष्ट्रहित, छात्रहित , तथा शिक्षकहित में शिक्षा के चार निकाय,नगर निगम,राजकीय निकाय, सहायता प्राप्त निकाय, नई दिल्ली नगर पालिका निकाय, में कार्य कर रहा है I
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में  डा० विनोद बछेती, समाजसेवी एवं निदेशक,डी पी एम आई मौजूद रहे I उन्होंने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जी का आदर्श स्वरुप प्रस्तुत किया इसके उपरांत नन्द किशोर शर्मा जी ने सभी शिक्षकों को उनके कर्तव्यों का संकल्प कराया I
मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली अध्यापक परिषद् के प्रदेश संगठन मंत्री राजेंद्र गोयल जी ने कहा कि समाज में अन्य व्यक्तियों के साथ साथ शिक्षक की जीवनशैली भी भौतिकतावाद से प्रभावित है। शिक्षक भी अपनी सीमित सोच के कारण दायित्वबोध के स्थान पर अपनी नौकरी की सुरक्षा और वेतन से सरोकार रखने वाला हो गया है। पेशेवर  शिक्षक बनने के कारण  हम अपनी  प्रतिष्ठा  और सम्मान  खोते जा रहे हैं यहाँ पर विद्यार्थियों के साथ उनका संपर्क समाप्त हो जाता है। दिल्ली अध्यापक परिषद का यह मत है कि  शिक्षकों के मानवीय मूल्य, आदर्श  व्यवहार,स्वानुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, सेवा भाव, नेतृत्वक्षमता, समानता, त्याग, एवं सकारात्मक सोच समाज के लिए अनुकरणीय होती है। महर्षि अरविंद के अनुसार अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं, वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने परिश्रम से उन्हें सींचते हैं। डा० भीमराव आंबेडकर की दृष्टि में अध्यापक  राष्ट्र का सारथी होता है, उसके हाथों में शिक्षा की बागडोर होती है, स्कूल सुसंस्कृत नागरिक निर्माण करने का पवित्र तीर्थ स्थल होता है।बाबा साहब का दृढ़ विश्वास था कि हम श्रेष्ठ शिक्षकों के द्वारा अपने देश की तकदीर बदल सकते हैं,संकीर्ण भावनाओं को दूर कर के नागरिकों को उचित शिक्षा देने का कार्य करके राष्ट्र के गौरव पूर्ण इतिहास की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत कर सकते हैं।परिषद का विचार है कि अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के साथ चलते हैं शिक्षकों के जो अधिकार होते हैं वह प्रशासन के कर्तव्य होते हैं, इसी प्रकार छात्रों के जो अधिकार हैं वे शिक्षक के कर्तव्य बन जाते हैं आज हम इस कर्तव्य बोध दिवस पर स्वामी विवेकानंद जी एवं सुभाषचंद्र बोस को याद करते हुए यह संकल्प करते हैं कि हम सभी अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा के साथ करेंगे एवं छात्रों का सर्वांगीण विकास करके इस राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने में सफल योगदान करेंगे,यह भाव हमेशा रहे यही कर्तव्य बोध दिवस का उद्देश्य है I
कार्यक्रम का अंत जिला अध्यक्ष पूर्वी जिला अनिल कुमार चौधरी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ I
इस अवसर पर एन डी एम सी निकाय के अध्यक्ष राजेंदर सिंह,संगठन मंत्री शिवेन्दर सिंह, विद्यालयों के प्राचार्य, एस एम सी उपाध्यक्ष , सदस्य, एवं समाज के विभन्न वर्गों के प्रबुद्ध व्यक्ति उपस्थित रहे, कार्यक्रम के सफल संचालन में पूर्वी जिला कार्यकारणी के श्री,रामगोपाल मीणा,जगदीश सोलंकी,अनिल कुमार पटेल,बीना रानी,उषा मानव, सतीश चंद्र,शिव कुमार शर्मा, दयानन्द सिंह का सराहनीय योगदान रहा I

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