पैराडाइज पेपर्स: अमिताभ, मान्यता समेत 714 भारतीयों के नाम आए सामने

पैराडाइज पेपर्स: अमिताभ, मान्यता समेत 714 भारतीयों के नाम आए सामने

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट यानी (ICIJ) के जरिये किए गए इस खुलासे को पैराडाइज पेपर्स का नाम दिया गया है। इससे संबंधित एक करोड़ से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स जर्मनी के अखबार सूडेयूटस्चे जीतियांग के पास मौजूद हैं। उन्होंने दुनियाभर के 96 मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर इन दस्तावेजों की जांच की है।

करोड़ों की संख्या में मौजूद इन दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि 180 देशों के सबसे ज्यादा लोगों ने काला धन देश से बाहर निकालने के लिए विदेशी कंपनियों का सहारा लिया है। उनमें भारत का स्थान 19वां है। इस सूची में मान्यता दत्त जैसे कई बॉलीवुड स्टार का नाम शामिल हैं। जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 714 भारतीयों ने इनमें पैसा लगाया है।

दिलनशीन संजय दत्त, बरमूडा में बनाई कंपनी –

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दिलनशीन संजय दत्त फिल्म स्टार संजय दत्त की पत्नी हैं, जिन्हें लोग मान्यता दत्त के नाम से भी जानते हैं। उन्होंने 2003 में आई गंगाजल फिल्म में आइटम नंबर किया था। फिलहाल वह संजय दत्त प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड की अहम सदस्य हैं। इसके अलावा, वह दीक्षस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, स्पार्कैटिक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, डायक्शियल रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, ईंट इन ब्रिक रेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, डूटो कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, डायक्शियल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, सविन्टी एमएम फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड और ट्रांसपेरेन्सी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के पद पर हैं।

बहामास रजिस्ट्री के दस्तावेजों के अनुसार दिलनशीन संजय दत्त ने बहामास के नसजय कंपनी लिमिटिड की निदेशक के पद पर थीं। दिलनाशीन संजय दत्त को अप्रैल 2010 में अपने निदेशक, प्रबंध निदेशक और कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस समझौते के तहत उन्होंने मुंबई के बांद्रा स्थित घर का पता दिया था। इस कंपनी ने 2010 में 5000 डॉलर की पूंजी दिखाई थी।

प्रतिक्रियाः बता दें इन खुलासे के बाद मान्यता दत्त के प्रवक्ता का कहना है कि आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार, सभी संपत्ति कंपनियां और बॉडी कार्पोरेट या किसी भी कंपनी के शेयरों को बैलेंस शीट में घोषित किया जा चुका था।

अमिताभ बच्चन, बरमूडा –

फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के 2000-02 में प्रसारित पहले संस्करण के बाद बरमूडा की एक डिजिटल मीडिया कंपनी के शेयरधारक बने थे। साल 2004 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिबरलाइज्ड रिमिटेंस स्कीम शुरू करने से पहले तक सभी भारतीयों को विदेश में किए गए निवेश की जानकारी आरबीआई को देनी होती थी। ये साफ नहीं है कि अमिताभ बच्चन ने ये जानकारी आरबीआई को दी थी या नहीं।

बरमूडा की कंपनी एपलबी के दस्तावेजों के अनुसार अमिताभ बच्चन और सिलिकॉन वैली के वेंचर इंवेस्टर नवीन चड्ढा, जलवा मीडिया लिमिटेड के 19 जून 2002 को शेयरधारक बने थे। ये कंपनी बरमूडा में 20 जुलाई 2002 को बनाई गई थी और साल 2005 में इसे भंग कर दिया गया। जलवा मीडिया शुरुआती डिजिटल मीडिया वेंचर में एक है। इसकी स्थापना चार भारतीय एंटरप्रेन्योर ने जनवरी 2000 में कैलिफोर्निया में की थी। इसकी भारतीय इकाई जलवा डॉट कॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (बाद में जलवा मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) फरवरी में बनी और बाद में जुलाई में बरमूडा में एक तीसरी कंपनी बनी।

इसके अलावा इन लोगों के नाम भी सामने आए हैं…

जालंधर के रहने वाले पवितार सिंह उप्पल रियल एस्टेट डेवलपर हैं। उन्होंने डोमेनिका में सिल्वरलाइन एस्टेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी बनाई थी। वहीं, कोटा के रवीश भादाना के माता-पिता कोटा में रहते हैं। सितंबर 2011 में दिल्ली पुलिस ने उसे फेक पायलट लाइसेंसिंग स्कीम के सरगना के रूप में पहचाना था। उस मामले में क्राइम ब्रांच ने चार मॉड्यूल्स और 11 पायलेट गिरफ्तार किए थे। रवीश तभी से भगोड़ा है। माल्टा रजिस्ट्री के रिकॉर्ड के अनुसार, वह निदेशक/ शेयरधारक/ न्यायिक प्रतिनिधि और दो फर्मों के कानूनी प्रतिनिधि है, जिनकी पंजीकरण संख्या अलग-अलग है।

Source:Agency

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