क्या सच में पागल हो गया है विकास ?

क्या सच में पागल हो गया है विकास ?

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भोपाल। अच्छे दिन की आस टूटी तो जनता में विरोध सब को दिखाई देने लगा। कुछ समाचार पत्र से लेकर सोशल मीड़ीया पर इसका खासा असर दिखाई दे रहा है। गुजरात में विकास पागल हो गया है ने तो धूम मचा दी है।  मोदी सरकार का विरोध चोतरफा हो रहा है। अस्पताल में बच्चे मर रहे है। सीमा पर सैनिक और देश के अंदर किसान, बेरोजगारी किसी से छुपी नहीं है। महंगाई कमर तोड़ रही है। रूपये की कीमत का क्या हाल है यह किसी को जानने का समय नही है। ऐसे में बुलेट ट्रेन चलाना इतना जरूरी हो गया हैं कि चालीस महिने सरकार में रहने के बाद भी केन्द्र सरकार अब तक पिछली सरकार को कोसने में लगी है। अब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा अपनी ही सरकार को आईना दिखा रहे है। अर्थव्यवस्था की हालत पर चर्चा के लिए उन्होंने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय मांगा था लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘‘मैंने पाया कि मेरे लिए दरवाजे बंद थे। इसलिएए मेरे पास बोलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। मुझे विश्वास है कि मेरे पास प्रधानमंत्री को देने के लिए उपयुक्त सुझाव हैं।’’

तो विरोधी इसके मायने तलाशने में लगे है। जो काम विपक्ष को करना था वह यशवंत ने किया है। अचानक से बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रधर्म याद आना कोई नया नही है। इससे पहले मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा और फिर कीर्ति आजाद जैसे कद्दावर नेता भी ऐसा करते रहे है। तो क्या इसके मायने यह है कि विकास सच में पागल हो गया है। जिसे विश्व मंदी दिखाई नहीं दी। अभी हम इससे उभरे भी नहीं थें कि देश में मंदी का दौर आ गया। ऐसे में सहयोगी भी कहने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे कि 2000 का नोट भ्रष्टा चार फैला रहा है इसे ततकाल बंद कराना चाहिए। याने हर फैसला अब उल्टा पडता जा हरा है। तो क्या यह सच मान लिया जाये कि विकास पागल हो गया है।

हमारे लिखने से और आपके मानने से कुछ नहीं होगा 2019 तक सब कुछ देखना और समझना होगा। अगली बार किसकी होगी सरकार यह मायने रखता है सच यही है कि भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं हैं। हर मोर्चे पर केन्द्र सरकार विफल है। विज्ञापनों में दिखाने से अच्छा है कि कुछ अच्छा कर लिया जाये। स्थिति यह बन रही है कि अब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता से कोई अपील करे या मन की बात कोई फर्क नहीं पड़ता। जनता मंशा समझ गई है। पिछले छह महिनों में युवाओं का मोह भी बीजेपी से भंग होता दिखाई दे रहा है।

बार- बार की हो रही घटनाओं से भविष्य का जायजा लिया जा सकता है। इस परिस्थिति को कुछ भाजपाई वरिष्ठ नेता अच्छे ये समझ चुके हैं। उनमें से एक है यशवंत सिन्हा जो भविष्य को भाप कर वर्तमान में उसका लाभ उठाने में पीछे नहीं हैं।

 

Source :- Agency

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