जाने- किस चिकित्सक के इस्तीफे के बाद लोगों के उड़ने लगे होश

➡️ एक जनवरी से बंद हैं जिला अस्पताल में

➡️ ऑपरेशन मरीजों को निजी अस्पतालों में लग रहा हजारों रुपए का झटका

➡️अस्पताल प्रशासन ने अब तक नहीं की वैक्लपिक व्यवस्था

✍️इम्तियाज खान✍️
बड़वानी। आकांशी योजना में देश के प्रमुख 10 जिलों में शामिल बड़वानी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दैंनदिन बढ़ रही हैं, लेकिन चिकित्सकों और स्टॉफ की पूर्ति करने में स्वास्थ्य विभाग असमर्थ बना हुआ है। निमाड़-अंचल में बेहतर सेवाओं के लिए प्रसिद्ध यहां के जिला अस्पताल में नए वर्ष से ऑपरेशन होना बंद हो गए है। इसका कारण एकमात्र एनेथिसिमिया विशेषज्ञ का इस्तीफा देना है। ऑपरेशन के लिए बेहोशी की दवा देने वाले चिकित्सक के इस्तीफे के बाद मरीजों को निजी क्लिनिक व अस्पतालों में हजारों रुपए खर्च लगने से उनके होश उडऩे लगे है।
उल्लेखनीय है कि आदिवासी बाहुल्य जिले के इस जिला अस्पताल में जिले के साथ खरगोन, धार तक के मरीज उपचार के लिए आते है। विशेषकर महिला अस्पताल में प्रतिदिन औसत 15 से 20 प्रसव होते है। इसमें औसत चार-पांच सीजन प्रतिदिन होते है। वहीं जिला अस्पताल में विभिन्न प्रकार के 25 से 30 मरीजों के ऑपरेशन प्रतिदिन किए जाते है। जिला अस्पताल में गत माह तक पदस्थ एनेथिसिया विशेषज्ञ डॉ. सरदारसिंह ने इस्तीफा दे दिया था। 31 जनवरी के बाद से उन्होंने जिला अस्पताल आना बंद कर दिया है। इसके बाद से जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में ऑपरेशन के पूर्व बेहोश करने की सुविधा बंद हो गई है। ऐसे में शासकीय स्तर पर मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे है।
➡️ ग्रामीण व गरीब लोगों की परेशानी बढ़ी
जानकारी के अनुसार लोगों को निजी अस्पताल व क्लिनिकों पर हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे है। जानकारी के अनुसार औसतन एक प्रसूता की डिलेवरी सीजर से होने पर निजी अस्पतालों में 40 से 50 हजार रुपए तक खर्च लगता है। जबकि जिला अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क रहती है। ऐसे में विशेषकर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रसूताओं व गरीब वर्ग के लोगों के लिए प्रसव सहित अन्य सभी तरह के ऑपरेशन करवाना महंगा साबित होने लगा है।
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➡️ प्रतिदिन भेज रहे डिमांड
सिविल सर्जन डॉ. अरविंद सत्य ने बताया कि जिला अस्पताल में पदस्थ एनेथिसिया विशेषज्ञ ने गत माह इस्तीफा दे दिया है। उसके बाद से जिला अस्पताल में ऑपरेशन सुविधा बंद हो चुकी है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन सहित कलेक्टर स्तर से प्रतिदिन उच्च स्तर पर डिमांड भेज रहे है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था करवाने का प्रयास कर रहे है। अस्पताल में तीन प्रथम श्रेणी और दो द्वितीय श्रेणी के सर्जन चिकित्सक है।

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