स्वाइन फ्लू से भी घातक बीमारी से हुई यूपी की एक महिला की मौत

इस मौसम में अगर  आपको तेज बुखार जोड़ों में दर्द, कंपकपी के साथ बुखार, अकड़न या शरीर का थका हुआ लगना, अधिक संक्रमण, गर्दन, बाजुओं के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां है, तो इसे सामान्‍य बुखार न मानें। यह बरसात में होने वाला स्क्रब टाइफस हो सकता है। जो समय पर उपचार न करवाने पर आपकी जान भी ले सकता है। दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद में शास्त्रीनगर निवासी एक महिला स्क्रब टाइफस नामक बीमारी से मौत होने का मामला सामने आया है।

नेहरूनगर स्थित यशोदा अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मुदित मोहन के अनुसार, एक तरह के कीड़े के काटने से फैलने वाली स्क्रब टाइफस बीमारी से एक 51 वर्षीय महिला की मौत हो गई। उनकी मानें तो पहले यह बीमारी पहाड़ों राज्यों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ही ज्यादा होती थी, लेकिन अब यह मैदान इलाकों में पैर पसार चुकी है। पिछले कुछ सालों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बी इस बीमारी के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन गाजियाबाद में यह पहली मौत है। विशेषज्ञों की मानें तो यह बीमारी डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू से भी घातक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर इस बीमारी में समय रहते मरीज को उपचार नहीं मिले तो उसकी मौत तक हो जाती है।

इस बीमारी से शोभा ने गंवाई जान

मिली जानकारी के मुताबिक, शास्त्रीनगर की रहने वाली शोभा अग्रवाल की तबीयत पांच सितंबर से बिगड़ी तो पति धीरज अग्रवाल ने गार्गी अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद नेहरूनगर यशोदा अस्पताल लेकर आए। इसके बाद हालत नहीं सुधरने से मरीज को दिल्ली रेफर करने की मांग की, क्योंकि रेफर करने के बाद यशोदा अस्पताल की रिपोर्ट उन्हें मिली,जिसमें स्क्रब टाइफस बीमारी की पुष्टि हुई थी। ऐसे में शोभा को दिल्ली के मैक्स अस्पताल ले जाया  गया, जहां पर उनकी मौत 12 सितंबर को हो गई। वहां की रिपोर्ट में भी स्क्रब टाइफस बीमारी की ही पुष्टि हुई थी।

बरतें सावधानी

यहां पर बता दें कि बरसात के दिनों में होने वाली बीमारियों से सावधान रहना चाहिए। बरसात के दिनों में फैलने वाली एक बीमारी हैै स्क्रब टाइफस। स्क्रब टाइफस ज्वर खतरनाक जीवाणु जिसे रिकेटशिया यानि संक्रमित माइट (पिस्सू) के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाड़ियों व घास में रहने वाले चूहों से पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के जरिये शरीर में प्रवेश करता है जिससे स्क्रब टाइफस बुखार होता है। वैसे तो यह इतना खतरनाक नहीं है, लेकिन अगर समय रहते इसका उचित इलाज नहीं किया जाये तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

स्क्रब टाइफस के लक्षण
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला अस्‍पताल के डॉ. राजेश गुलेरी बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार जो 104 से 105 डिग्री, जोड़ों में दर्द, कंपकपी के साथ बुखार, अकड़न या शरीर का थका हुआ लगना, अधिक संक्रमण, गर्दन, बाजुओं के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना स्क्रब टाइफस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण पर मरीज को नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र में जांच करवा लेनी चाहिए।

ऐसे बचे स्क्रब टाइफस से
डॉ. गुलेरी का कहना है कि बरसात के दिनों में जंगली पौधे खुद व खुद उगने लगते हैं इसीलिए घर के आस-पास घास या झाड़ियां न उगने दें तथा समय-समय पर सफाई करते रहें। शरीर को स्वच्छ रखें और हमेशा साफ कपड़े पहने। आसपास जलजमाव बिल्कुल न होने दें। घर के अन्दर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव अवश्य करें। खेतों में काम करते समय अपने हाथ पैरों को अच्छे से ढक कर रखें। अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरन्त चिकित्सक से मिलें और रक्त जांच जरूर करा लें। डॉ गुलेरी बताते हैं कि बरसात के मौसम में इस बीमारी से रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। इसका इलाज बहुत आसान है, तुरन्त डॉ. को दिखाना। यह रोग एक आदमी से दूसरे को नहीं फैलता है।

डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी घातक

चिकित्सकों की मानें तो स्क्रब टाइफस बीमारी डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी घातक है। इसके लक्षण कुछ-कुछ चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं,लेकिन समय पर इलाज न मिली तो मरीज जान से हाथ धो बैठता है।

क्या है स्वाइन फ्लू

यहां पर बता दें कि साधारण व आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाने वाला इंफ्लूजा एक विशेष प्रकार के वायरस इंफ्लूजा ‘ए’ एच1 एन1 के कारण फैल रहा है। यह वायरस सुअर में पाए जाने वाले कई प्रकार के वायरस में से एक है। सुअर के शरीर में इस वायरस के रहने के कारण ही इसे स्वाइन फ्लू कहते हैं। वायरस के ‘जीन्स’ में स्वाभाविक तौर पर परिवर्तन होते रहते हैं।

फलस्वरूप इनके आवरण की संरचना में भी परिवर्तन होते रहते हैं। 2009 में फैले स्वाइन फ्लू के कारण इंफ्लूजा ‘ए’ टाइप के एक नए वायरस एच1 एन 1 के कारण यह बीमारी फैल रही है। 1918 की फ्लू महामारी में वायरस का स्रोत सुअर थे। इस फ्लू को स्पेनिश फ्लू के नाम से जाना जाता है। जीन परिवर्तन से बनी यह किस्म ही मैक्सिको, अमेरिका और पूरे विश्व में स्वाइन फ्लू के प्रसार का कारण बन रही है।

ऐसे फैलती है बीमारी
स्वाइन फ्लू का संक्रमण व्यक्ति को स्वाइन फ्लू के रोगी के संपर्क में आने पर होता है। इस रोग से प्रभावित व्यक्ति को स्पर्श करने (जैसे हाथ मिलाना), उसके छींकने, खांसने या पीड़ित व्यक्ति की वस्तुओं के संपर्क में आने से स्वाइन फ्लू से कोई व्यक्ति ग्रस्त होता है। खांसने, छींकने या आमने-सामने निकट से बातचीत करते समय रोगी से स्वाइन फ्लू के वायरस दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र (नाक, कान, मुंह, सांस मार्ग, फेफड़े) में प्रवेश कर जाते हैं। अनेक लोगों में यह संक्रमण बीमारी का रूप नहीं ले पाता या कई बार सर्दी, जुकाम और गले में खराश तक ही सीमित रहता है।

Posted by:- Vikash kaushik

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