क्या है कश्मीर के हालात की सच्चाई क्या बया करते है वहा के हालात

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से कहा जा रहा है कि अब जम्मूसमेत पूरे राज्‍य का तेजी से विकास हो सकेगा। मगर यदि बीते कुछ सालों की बात करें और विभिन्‍न स्‍तरों पर आंकड़ों को देखें तो जम्मू कश्मीर के हालात अन्य प्रदेशों से काफी अच्छे हैं। जम्मू की हालत जनसंख्या के लिहाज से बड़े यूपी और बिहार से भी अच्छी है। यदि कुछ मानकों पर जम्मू कश्मीर की तुलना अन्य राज्यों से करें तो जम्मू के हालात अच्छे दिखाई देते हैं।

आंकड़े ये भी बयां करते हैं कि जम्‍मू कश्‍मीर को जितना पिछड़ा बताया जाता रहा है हकीकत में वह ऐसा नहीं है। यदि बीते 5 सालों की तुलना करें तो यहां पर स्वास्थ्य, लिंग अनुपात, अर्थव्‍यवस्‍था, रोजगार, प्रजनन क्षमता, औसत उम्र, प्रति व्यक्ति आय, गरीबी रेखा, शिक्षा का आंकड़ा, स्नातक और उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या किसी भी बड़े राज्य से कम नहीं है। आइए देखते हैं कुछ अलग-अलग बिंदुओं पर जम्मू कश्मीर किन-किन राज्यों से संसाधनों के मामले में संपन्न है।
साल 2017 के आंकड़ों को देखें तो जम्‍मू कश्‍मीर में जन्‍म के समय मरने वाले (Mortality Rate) बच्चों की संख्या बहुत ही कम है। यदि यहां पर 1000 बच्चों का जन्म होता है तो उसमें से मात्र एक की ही मौत होती है। यदि अन्य राज्यों से इस चीज की तुलना करें तो ये आंकड़ें काफी बेहतर नजर आते हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो उनमें केरल, तमिलनाडु और दिल्ली को शामिल किया गया है। इन राज्यों में क्रमशः प्रति हजार बच्चों के जन्म लेने पर मृत्युदर 10, 16 और 16 है। सबसे अधिक खराब हालात मध्य प्रदेश, असम और ओडिशा के हैं। मध्य प्रदेश में प्रति हजार बच्चों के जन्म लेने पर 47, असम में 44 और ओडिशा में 41 बच्चों की मौत हो जाती है।
औसत उम्र के मामले में जम्मू कश्मीर में रहने वालों की औसम उम्र भी अन्य जगहों के मुकाबले अधिक है। यदि भारत में प्रति व्यक्ति की औसम आयु 68 साल मानी जा रही है तो जम्मू कश्मीर में 73 साल की आयु को औसत उम्र है। इसके अलावा केरल में 75 और दिल्ली में यह 74 साल है। कम औसम उम्र वाले राज्यों में यूपी, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का नाम आता है। यूपी में 64 साल, छत्तीसगढ़ में 65 साल और मध्य प्रदेश में भी 65 साल मानी जा रही है।
जम्मू कश्मीर में कुल उपजाऊपन दर भी कुछ अन्य राज्यों के मुकाबले अच्छी है। दिल्ली, जेएंडके, पंजाब, तमिलनाडु, वेस्ट बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश में ये दर 1.5 से 1.6 के बीच ही रहती है। जबकि सबसे खराब हालात यूपी, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की है। यूपी में 3.2, छत्तीसगढ़ में 3 और मध्य प्रदेश में 2.7 है।

यदि जन्म के समय प्रति एक हजार बच्चों पर लड़कियों की संख्या की बात करें तो वो भी अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक है। छत्तीसगढ़ में प्रति एक हजार बच्चों पर लड़कियों की संख्या 961, केरला में 948 और वेस्ट बंगाल में 939 है। सबसे खराब हालात हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड राज्यों की है। हरियाणा में प्रति एक हजार लड़कों पर 833 लड़कियां, उत्तराखंड में 841 और दिल्ली में 850 है।
यदि सकल राज्य घरेलू उत्पाद की बात करें तो इसमें भी जम्मू कश्मीर ने बिहार और उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ रखा है। यूपी और बिहार से अच्छे हालात जम्मू कश्मीर के हैं। सबसे बेहतर स्थिति दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र की है। दिल्ली में प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2.87 लाख है। इसके बाद हरियाणा 1.98 लाख और फिर महाराष्ट्र 1.87 लाख के साथ तीसरे नंबर पर है। सबसे खराब हालात बिहार, यूपी और झारखंड की है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय 40, 832, उत्तर प्रदेश में 57,024 और झारखंड में 69,692 है।

सकल राज्य घरेलू उत्पाद विकास दर
यदि जम्मू कश्मीर में सकल राज्य घरेलू उत्पाद विकास दर की बात करें तो उसमें भी कश्मीर की स्थिति बहुत खराब नहीं है। इसकी दर 5.5 फीसदी है। इस मामले में गुजरात सबसे आगे है। गुजरात में 9.8. दिल्ली में 8.4 और मध्य प्रदेश में 8.3 है। खराब प्रदेशों की बात करें तो वेस्ट बंगाल के हालात सबसे अधिक खराब है। वेस्ट बंगाल 4.8, झारखंड 5.2 और जेएंडके में 5.5 है।

गरीबी का अनुपात साल 2011-12
गरीबी के अनुपात के मामले में भी जम्मू कश्मीर की स्थिति खराब नहीं है। इसके अंतर्गत अच्छी स्थिति की ग्रेडिंग में पंजाब पहले और खराब स्थिति की ग्रेडिंग में ओडिशा तीसरे स्थान पर है। पंजाब 8.3, हिमाचल 8.1 और केरल 7.1 के स्थान पर है। खराब हालात वालों में झारखंड-37.0, बिहार- 33.7 और ओडिशा-32.6 के स्थान पर है।

बेरोजगारी का अनुपात साल 2017-18
बेरोजगारी अनुपात में भी जम्मू की स्थिति ठीक दशा में है। इसका प्रतिशत 5.3 है। बेहतर प्रदेशों की बात करें तो छत्तीसगढ़-3.3, आंध्र प्रदेश-4.5 और मध्य प्रदेश भी 4.5 के साथ अच्छी स्थिति में है। खराब हालात में केरल-11.4, दिल्ली-9.7 और हरियाणा-8.6 के नाम है।
साक्षरता अनुपात के मामले में भी जम्मू कश्मीर के आंकड़े खराब नहीं है। जम्मू कश्मीर में ये 67.2 फीसद है। अच्छे प्रदेशों की बात करें तो केरल में 94, दिल्ली में 86.2 और हिमाचल में 82.8 फीसद है। खराब प्रदेशों में केरल 11.4, दिल्ली 9.7 और हरियाणा में 8.6 है।

साक्षरता दर
जम्मू कश्मीर में साक्षरता दर भी ठीक स्थिति में है। यहां की साक्षरता दर 67.2 फीसद है। सबसे अधिक खराब प्रदेशों में बिहार-61.8, अरूणाचल-65.4 और राजस्थान-66.1 के साथ खराब स्थान पर है। अच्छे प्रदेशों में केरल-94, दिल्ली-86.2 और हिमाचल-82.8 के साथ बेहतर स्थिति में है।

स्नातक और उससे की शिक्षा की आबादी
यदि स्नातक और उससे अधिक की शिक्षा वालों की बात करें तो दिल्ली बाकी राज्यों की तुलना में तीन गुना अधिक आगे है। कश्मीर में जहां ये मात्र 5.2 फीसद है वहीं दिल्ली में ये 16.4. उत्तराखंड में 9 और महाराष्ट्र में 7.7 फीसद है। सबसे खराब हालात में बिहार, असम और झारखंड राज्यों के नाम है। बिहार-2.9, असम-3.2 और झारखंड का 4 फीसद है।

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