बॉलीवुड के बड़े सितारों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी है।

भारतीय फौजी के कदम जब बढ़ते हैं तो बढ़ते ही जाते हैं। उसके कदम पीछे नहीं लौटता। वह वापस आता है तो दुश्मनों को मारकर या फिर तिरंगे में लिपटकर। कारगिल सहित तमाम युद्धों में सेना के वीर जवानों ने ऐसा कर दिखाया। चीन के साथ रेंजागला के युद्ध में हमारे कुछ जांबाजों ने अप्रतिम शौर्य का प्रदर्शन किया था। गाजर-मूली की तरह से दुश्मनों का सफाया किया था। उन्हीं वीर जवानों की याद में कवि प्रदीप ने गीत रचा था और जिसे स्वर दिया था लता मंगेशकर ने। यह गीत उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में गाया था।

यह गीत है

ऐ मेरे वतन के लोगों

जरा आंख में भर लो पानी

जो शहीद हुए हैं

उनकी जरा याद करो कुर्बानी

वहीं, शुक्रवार को कारगिल शहीदों की याद में शनिवार को एक गीत सेना की तरफ से जारी किया गया। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में गीतजारी कर कहा यह गीत कारगिल युद्ध में लड़ने वाले अधिकारियों और सैनिकों की बहादुरी के लिए एक श्रद्धांजलि है।

इस गीत में शहीदों की कुर्बानी को याद किया गया।  यह गीत प्रख्यात गीतकार समीर अनजान ने लिखा है और इसकी शूटिंग लेह, लद्दाख में हुई है। गीत को स्वर दिया है शतदु्र कबीर ने। यह गीत यूट्यूब पर अपलोड होने के चंद घंटों बाद ही हजारों लोग देख चुके थे।

सितारों ने दी श्रद्धांजलि

इसमें बॉलीवुड के बड़े सितारों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। इस वीडियो को सेना ने अपने ट्विटर और फेसबुक पेज पर शेयर किया है। अमिताभ बच्चन, सलमान खान, सुनील शेट्टी, अर्जुन रामपाल, अनुपम खेर, शबीर बॉक्सवाला, रोजी सिंह, कंगना रानौत, कृति सेनन, सोनू सूद, विक्की कौशल, मैरी कॉम, जरीन खान ने इसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। वो भी गीत में अभिनय करते हुए भावुक हो गए हैं। हिंदुस्तान ने इन वीर जवानों को कैसे याद किया आइए उसे गुनें, महसूस करें और दिल में उतारें…।

मेरी मिट्टी की संतानों

कारगिल के वीर जवानों

मेरी आन के वीर

मेरी शान के वीर

तूने हंस के दे दी अपनी जान

तुझे भूलेगा न तेरा हिंदुस्तान

तुझे भूलेगा न तेरा हिंदुस्तान

तुझे भूलेगा न तेरा हिंदुस्तान…

बर्फीली इन चट्टानों पर तू

शोला बनकर लड़ता रहा

जख्मों नहीं देखे

बस आगे बढ़ता रहा

दुश्मन का हौसला चूर किया

उन्हें हारने पर मजबूर किया

जब गोली लगी तेरे सीने पर

तब ठहर गईं मेरी सांसे

जब तूने मुझे अलविदा कहा

तब बरस पड़ीं मेरी आंखें

सूरज की तरह ताबिंदा है

तू मरके भी जिंदा है

तू खेतों में खलिहानों

तू लहराए मेरी फसलों में

तेरी ही झलक दिखे मुझको

मेरी आने वाली नस्लों में

तू जो खाया नमक मेरा

उसका पूरा हक अदा किया

कुर्बानी जिसको कहते हैं

सारी दुनिया को बता दिया

हर हिंदुस्तानी कहता है तू

उसकी लहू में बहता है…

तेरे माता पिता, बीवी बच्चे

रहते हैं मेरी पनाहों में

कभी आंच नहीं आने दूंगा

कभी आंच नहीं आने दूंगारी

रखूंगा उन्हें निगाहों में

मेरी आन के वीर

मेरी शान के वीर

तूने हंस के दे दी अपनी जान

तुझे भूलेगा न तेरा हिंदुस्तान

वह दिन फिर याद आया जब तिरंगे में लिपटकर मेरा बेटा वापस आया था

कारगिल शहीद कैप्टन विजयंत थापर की मां तृप्ता थापर कहती हैं कि यह गीत सुनकर एक बार फिर कारगिल की यादें ताजा हो गईं। मुझे तीन जुलाई का वह दिन फिर सामने आ गया, जब मेरा बेटा तिरंगे में लिपटकर घर आया था। विजयंत को आखिरी बार देखने के लिए पूरा नोएडा उमड़ा था। उन लोगों ने मेरा दुख बांटा। अन्य 529 मांओं ने भी अपने बेटों को देश के लिए न्योछावर कर दिया था।

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