कांग्रेस – राहुल ने कहा- चुनाव में हार के बाद अब मैं अध्यक्ष नहीं

राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा वापस लेने की अटकलों को खत्म कर दिया। उन्होंने बुधवार को चार पेज का बयान जारी कर कहा, ”पार्टी अध्यक्ष होने के नाते लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी मेरी है। कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालना सम्मान की बात रही, लेकिन पार्टी के भविष्य के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। यही वजह है कि मैंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। पार्टी को कड़े फैसले लेने और बाकी नेताओं की जवाबदेही भी तय करने की जरूरत है।”

इससे पहले संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं अपना इस्तीफा पहले ही दे चुका हूं। अब मैं पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी को बैठक कर जल्द नए अध्यक्ष पर फैसला करना चाहिए। राहुल दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। उन्होंने 25 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस्तीफे की पेशकश की थी। उन्होंने अब अपने ट्विटर हैंडल से भी अध्यक्ष शब्द हटा दिया है।

आगे क्या?

  • कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में नए अध्यक्ष के चुनाव का प्रस्ताव पारित हो सकता है। नई सीडब्ल्यूसी भी गठित की जा सकती है।
  • अध्यक्ष पद के लिए पूर्व गृह मंत्री सुशील शिंदे का नाम सबसे आगे है। हालांकि, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम की भी चर्चा है।
  • नया अध्यक्ष चुने जाने तक कांग्रेस किसी नेता को कार्यकारी अध्यक्ष बना सकती है। इसके लिए मोतीलाल वोरा के नाम की चर्चा है।
  • कांग्रेस को 21 साल बाद गैर-गांधी अध्यक्ष मिल सकता है। 1996-98 में सीताराम केसरी अध्यक्ष थे। उनके बाद सोनिया गांधी दिसंबर-2017 तक अध्यक्ष रहीं।

राहुल का ट्वीट

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Rahul Gandhi

@RahulGandhi

It is an honour for me to serve the Congress Party, whose values and ideals have served as the lifeblood of our beautiful nation.

I owe the country and my organisation a debt of tremendous gratitude and love.

Jai Hind 🇮🇳

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‘पार्टी के पुनर्विकास के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी’

राहुल ने लिखा, ”कांग्रेस पार्टी की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। इस पार्टी के सिद्धांत और आदर्शों ने हमारे खूबसूरत देश की जीवनधारा के रूप में सेवा की। मेरे ऊपर पार्टी और देश से मिले प्यार का बहुत बड़ा कर्ज है। कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते मैं 2019 चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार हूं। पार्टी के भविष्य में विकास के लिए जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है। यही वह वजह है, जिसके लिए मैंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। पार्टी के पुनर्विकास के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी है और 2019 की नाकामी के लिए बहुत सारे लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते यह नाइंसाफी होगी कि मैं दूसरों को जिम्मेदार ठहराऊं और अपनी जिम्मेदारी को नजरंदाज कर दूं।”

मैं नए व्यक्ति का चयन करूं यह सही नहीं- राहुल

राहुल ने लिखा, ”मेरे बहुत सारे साथियों ने यह सुझाव दिया कि मैं पार्टी का अगला अध्यक्ष तय करूं। जब यह जरूरी है कि कोई नया व्यक्ति पार्टी का नेतृत्व करे तो यह मेरे लिए सही नहीं होगा कि मैं नए व्यक्ति का चयन करूं। हमारी पार्टी का पुराना इतिहास है, यह संघर्षों और गौरवपूर्ण विरासत वाली पार्टी है, जिसकी मैं तहेदिल से इज्जत करता हूं। यह भारत के धागों में बुनी हुई पार्टी है। मुझे पूरा विश्वास है कि पार्टी इस संंबंध में सबसे अच्छा निर्णय लेगी कि इसका साहस, प्यार और ईमानदारी से कौन नेतृत्व करे।”

उन्होंने कहा, ”इस्तीफा देने के तुरंत बाद मैंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के अपने साथियों को सुझाव दिया था कि नए पार्टी अध्यक्ष की खोज शुरू कर दी जाए। मैंने उन्हें यह करने का अधिकार दिया और प्रतिबद्धता दिखाई कि इस प्रक्रिया और सुचारू परिवर्तन को मेरा पूरा समर्थन रहेगा।”

”भारत का निर्माण करने वाले आदर्शों के लिए लड़ा”

राहुल ने लिखा, ”हमने मजबूती से चुनाव लड़ा। हमारा चुनाव अभियान भाईचारे, सहिष्णुता, देश के हर नागरिक, धर्म और समुदाय के लिए सम्मान का रहा। मैंने प्रधानमंत्री, संघ और उनके द्वारा हथिया लिए गए संस्थानों से पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी। मैं लड़ा, क्योंकि मैं भारत को प्यार करता हूं। मैं उन आदर्शों की रक्षा के लिए लड़ा, जिन पर भारत का निर्माण हुआ। अब मैं पूरी तरह अकेला खड़ा हूं और इस पर मुझे बहुत गर्व है। मैंने प्यार और शालीनता के बारे में अपने साथियों, कार्यकर्ताओं, महिलाओं-पुरुषों से काफी कुछ सीखा।”

चुनाव स्वतंत्र संस्थानों के बिना संभव नहीं- राहुल

उन्होंने लिखा, ”स्वतंत्र और साफ चुनाव के लिए देश के संस्थानों का निष्पक्ष होना जरूरी है। चुनाव स्वतंत्र मीडिया, स्वतंत्र न्यायपालिका, पारदर्शी चुनाव आयोग के बिना संभव नहीं है। एक चुनाव का पारदर्शी होना तब भी संभव नहीं है, जब एक पार्टी का वित्तीय संसाधनों पर एकाधिकार हो। हमने 2019 में किसी राजनीतिक दल से लड़ाई नहीं लड़ी। हमने पूरे देश की मशीनरी, संस्थानों से लड़ाई लड़ी, जिन्हें विपक्ष के खिलाफ खड़ा कर दिया गया था। यह अब पूरी तरह साफ है कि देश के संस्थानों में अब वह निष्पक्षता नहीं रही, जो कभी भारत में थी।”

‘लोकतंत्र संवैधानिक तौर पर कमजोर हो गया’

राहुल ने लिखा- देश को लेकर संघ का मकसद, देश के संस्थागत ढांचे का अधिग्रहण अब पूरा हो गया है। हमारा लोकतंत्र संवैधानिक तौर पर कमजोर हो गया है। चुनाव अब देश का निर्धारण करने की जगह, महज रिवाज बन गए हैं। सत्ता को हथियाने का यह काम कई चरणों पर हिंसा और भारत को मिल रहे दर्द के रूप में दिखाई दे रहा है। किसान, बेरोजगार युवा, महिलाएं, आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा कष्ट भोगेंगे। हमारी अर्थव्यवस्था और देश की गरिमा नष्ट हो जाएगी। प्रधानमंत्री की जीत उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खत्म नहीं करती। प्रचार और पैसा कभी भी सच की रोशनी को दबा नहीं सकते। भारत के लिए जरूरी है कि वह अपने संस्थानों के पुनरुद्धार के लिए एकजुट हो और इस पुनरुद्धार का औजार कांग्रेस पार्टी बनेगी।”

कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूंगा- राहुल

उन्होंने लिखा, ”देश और विदेश में, उन हजारों भारतीयों को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे पत्र और समर्थन के संदेश भेजे हैं। मैं अपनी पूरी ताकत से कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूंगा। जब भी उन्हें मेरी सेवाओं या सुझाव की आवश्यकता होगी, मैं पार्टी के लिए उपलब्ध हूं। जो लोग कांग्रेस की विचारधारा का समर्थन करते हैं, विशेष रूप से हमारे समर्पित और प्यारे कार्यकर्ताओं के लिए, मुझे अपने भविष्य और आपके प्रति अत्यंत प्रेम पर पूर्ण विश्वास है। यह भारत में एक आदत है कि कोई भी शक्तिशाली सत्ता से चिपका रहता है, सत्ता का बलिदान नहीं करता। लेकिन हम एक गहरी वैचारिक लड़ाई और सत्ता की इच्छा का त्याग किए बिना अपने विरोधियों को परास्त नहीं कर पाएंगे। मैं एक कांग्रेसी पैदा हुआ था, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और लहू के हर एक कतरे की तरह मेरे जीवन का अमिट हिस्सा है और हमेशा रहेगी।”

राहुल 25 मई को इस्तीफे की पेशकश की थी
वायनाड से सांसद राहुल गांधी 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। लोकसभा चुनाव में मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए 25 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, पार्टी ने इसे स्वीकार नहीं किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल के इस्तीफे के खिलाफ थे। उन्होंने सोनिया गांधी से राहुल को मनाने के लिए भी कहा था। लेकिन इसके बाद भी राहुल लगातार इस पर अड़े रहे।

कांग्रेस मुख्यमंत्रियों ने राहुल को मनाने के लिए की थी मुलाकात
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत पांच कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने साेमवार काे राहुल से मुलाकात कर उनसे पद पर बने रहने की अपील की थी। गहलोत के अलावा इनमें पंजाब के सीएम कै. अमरिंदर सिंह, मप्र के सीएम कमलनाथ, छग के सीएम भूपेश बघेल तथा पुद्दुचेरी के सीएम वी नारायणसामी थे।

शिंदे बन सकते हैं नए अध्यक्ष
राहुल से मुलाकात के बाद सीएम गहलोत ने कहा था, ”हमने राहुल को कांग्रेस नेताओं की भावनाओं से अवगत कराया। मुझे लगता है कि वे सही निर्णय लेंगे।” माना जा रहा है कि महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं।