मेरठ मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने शव के किए 10 एक्सरे, पांच घंटे पहले हो चुकी थी मौत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति की मौत के बाद डॉक्टरों ने शव के 10 एक्सरे किए। मामले के पांच दिन बाद इस लापरवाही का खुलासा हुआ तो कॉलेज प्रशासन ने दो जूनियर डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया। वहीं, इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) समेत 11 कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। माना जा रहा है कि

जवाब आने के बाद कई और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

जानकारी के मुताबिक मामला 20 जून का है। मेरठ के जागृति विहार में रिक्शा को कार ने टक्कर मार दी। हादसे में घायल रिक्शा चालक को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इसके बाद सीनियर डॉक्टरों की अनुमति के बिना डॉक्टरों ने शव के 10 एक्स-रे कर दिए। तीन दिनों तक इस पूरे प्रकरण को कॉलेज प्रशासन ने छिपाए रखा। हालांकि, बाद में जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने मेडिकल ऑफिसर, जूनियर डॉक्टर और स्टाफ से जवाब तलब किया तो मामला सुर्खियों में आ गया।

बताया जा रहा है कि रिक्शा चालक को सुबह 10 बजे भर्ती कराया गया, जबकि एक्सरे शाम छह और सात बजे के बीच किए गए। जबकि रिक्शा चालक की मौत दोपहर करीब 12 बजे हो गई थी। ऐसे में मौत के करीब 5 घंटे बाद एक्सरे किया गया।

सलाह किए बिना खुद एक्सरे करने का लिया निर्णय
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि जिन दो जूनियर डॉक्टरों को सस्पेंड किया गया, उनमें सर्जरी विभाग के डॉ. निकुंज और हडडी विभाग के डॉ. सुप्रियो हैं। आरोप है कि इन्होंने अपने सीनियर डॉक्टर से सलाह नहीं ली और खुद ही एक्सरे करने का निर्णय लिया।

 

डॉक्टर ने कहा- हम जानना चाहते थे कि मौत कैसे हुई?

दूसरी ओर एक्सरे करने वाले डॉक्टर और स्टाफ का कहना है कि वे यह जानना चाहते थे कि मौत कैसे हुई। इसी वजह से एक्सरे किया। बताया जा रहा है कि रिक्शा चालक को सुबह 10 बजे भर्ती कराया गया, जबकि एक्सरे शाम छह और सात बजे के बीच कराए गए। जबकि रिक्शा चालक की मौत दोपहर करीब 12 बजे में होनी बतायी जा रही है। ऐसे में मौत के करीब 5 घंटे बाद शव का एक्सरे किया गया।