आंगन में लगे पेड़ पर फंदा लगाकर किसान ने आत्महत्या की, 6 लाख कर्जा था

फाजिल्का जिले के बहाववाला गांव में कर्ज से परेशान एक किसान ने घर के आंगन में लगे पेड़ पर ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके सिर पर 6 लाख रुपए का कर्जा था। बताया जाता है कि उसने और भाई ने बेटी की शादी के लिए के विवाह के समय जमीन को गिरवी रखकर पीएनबी बैंक व गांव में बनी सोसायटी से लोन लिया था। बाद में भाई की मौत हो गई तो सारा बोझ अकेले उसी के कंधों पर आ गया था।लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में इस तरह का यह पहला मामला है।

गांव बहाववाला निवासी लाभ सिंह पुत्र मेहर के बेटे हरजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता व चाचा अमृतपाल सिंह द्वारा उसकी बहन के विवाह के समय जमीन को गिरवी रखकर पीएनबी बैंक व गांव में बनी सोसायटी से लोन लिया था। शादी के कुछ समय के बाद चाचा अमृतपाल की मौत हो गई व पिता लाभ सिंह के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेवारी आ गई। जमीन से ज्यादा आमदन नहीं हो रही थी और दिन-प्रतिदिन लोन की रकम का ब्याज भी बढ़ता चला जा रहा था। इसका बोझ उसके पिता सहन नहीं कर रहे थे और पिछले कुछ समय से मानसिक तौर पर परेशान चले आ रहे थे। इसी मानसिक परेशानी के चलते उन्होंने बीती रात घर में वृक्ष पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

कर्ज वसूली के लिए कर्मचारी आते थे घर, डेढ़ लाख बन गया था ब्याज
बेटे ने बताया कि एक तरफ कर्ज का बोझ पिता को सता रहा था तो दूसरी तरफ बैंक और सोसायटी के कर्मचारियों पर पैसे रिकवर करने को लेकर पूरा दबाव बना हुआ था। इस कारण बैंक वाले रिकवरी के लिए अकसर घर आया करते जिसे पिता सहन नहीं कर पा रहे थे। वीरवार रात जब परिवार सो रहा था तो लाभ सिंह द्वारा घर के पीछे एक वृक्ष पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली गई। पिता ने चाचा के साथ मिलकर पीएनबी बैंक से डेढ़ लाख का कर्ज लिया जो कि न भरने के कारण ब्याज सहित तीन लाख रुपए बन गया था। इसी प्रकार गांव में बनीं सोसायटी से भी कर्ज लिया जिसका कुल 3 लाख रुपए के करीब बकाया है, दोनों संस्थानों की 6 लाख रुपए देनदारी है। वीरवार को पीएनबी बैंक का कर्मचारी घर में पैसा रिकवर करने के लिए आए थे, उन्हें एक बार पिता ने वापस भेज दिया और रात के समय उन्होंने ये कदम उठा लिया।

रात 2 बजे बेटा उठा तो पिता गायब मिले
जहां पूरा परिवार रात को 11 बजे सोया तो अचानक हरजीत सिंह की जाग खुल गई और उसने रात 2 बजे उठकर देखा तो पिता घर में नहीं थे। आस-पास उसने पिता को देखा तो वो पेड़ पर लटके हुए पाए। उसने इसकी सूचना गांव के सरपंच राज सिंह तथा पुलिस को दी। जिस पर बहाववाला के एएसआई त्रिलोक सिंह मौके पर पहुंचे और शव को सरकारी अस्पताल में लेकर आए। शुक्रवार को उसके शव के पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।

सरकार से थी यह आस

लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में इस तरह का यह पहला मामला है। इससे पहले किसानों को उम्मीद थी कि सरकार छोटे कर्जदार किसानों के बाद बड़े कर्ज वाले किसानों को कुछ न कुछ राहत जरूर दिलवाएगी, लेकिन सरकार ने बड़े कर्ज वाले किसानों के बारे में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया और न ही किसानों को इस मकड़जाल से बाहर निकालने के लिए कोई प्रयत्न किया है।

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