मिशन चंद्रयान-2: अब चांद पर ‘प्रज्ञान’ को राह दिखाएगा आइआइटी कानपुर

पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए ग्रीन जेल बनाने वाला आइआइटी कानपुर अब मिशन चंद्रयान-2 में भी बड़ी भागीदारी कर रहा है। आइआइटी का सॉफ्टवेयर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के बाद यान के रोवर ‘प्रज्ञान’ को राह दिखाएगा। फिर, चंद्र-सतह पर पानी व खनिज की तलाश करेगा। फोटो खींचकर भेजेगा। इसके आधार पर इसरो शोध करेगा।

यह सॉफ्टवेयर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आशीष दत्ता व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. केएस वेंकटेश ने बनाया है। 15 जुलाई को रवाना हो रहे चंद्रयान-2 का मकसद चंद्रमा के अनछुए हिस्सों पर जीवन की संभावना तलाशना है। चंद्रयान का रोवर प्रज्ञान वहां पानी व खनिज की तलाश आसानी से कर सके, इसके लिए आइआइटी कानपुर ने मोशन प्लानिंग एंड मैपिंग जेनरेशन सॉफ्टवेयर बनाया है। सॉफ्टवेयर रोवर को मूवमेंट और राह बताएगा। रूट भी निर्धारित करेगा, जिससे ऊर्जा खपत सबसे कम हो। टारगेट तक पहुंचाने के लिए रोवर को बाधाओं से भी आगाह करेगा।

इंटेलीजेंट कंट्रोल सिस्टम, माइक्रो सेंसर व बायो रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम कर रहे प्रो. दत्ता ने बताया कि एलगोरिदम मेथड पर आधारित सॉफ्टवेयर बनाने में सालभर लगा। इसरो के प्रोजेक्ट पर आइआइटी की टीम पांच साल से काम कर रही है। मिशन चंद्रयान-2 के तहत मोशन प्लानिंग व मैपिंग जेनरेशन सॉफ्टवेयर को इसरो ने स्वीकार भी कर लिया है।

टेक्निकल फेस्ट में रहा था आकर्षण का केंद्र

15 जुलाई को चंद्रयान-2 अभियान के सॉफ्टवेयर परीक्षण के लिए बनाया गया लूनर रोवर आइआइटी की टेक्निकल फेस्ट का हिस्सा रहा था। इसी लूनर रोवर पर प्रज्ञान के लिए सॉफ्टवेयर का परीक्षण हुआ था। प्रदर्शनी में यह आकर्षण का केंद्र रहा था।

ऐतिहासिक होगा मिशन चंद्रयान-2

जानकारों का कहना है, मिशन चंद्रयान-2 में पहली बार भारतीय सॉफ्टवेयर से निर्देशित लूनर रोवर का प्रयोग होगा। इस भारतीय-अमेरिकन संयुक्त अभियान में करीब डेढ़ दर्जन परीक्षण हुए हैं, जिससे चंद्र सतह पर जीवन व मिनरल संबंधी सभी जानकारी मिल सके।

सतह खोद कर खोजेगा पानी

-सॉफ्टवेयर प्रज्ञान को चंद्र सतह ड्रिल कर पानी व केमिकल तलाशने में मदद करेगा।

– 20 वॉट की सौर व बैटरी की ऊर्जा से चलेगा।

– केमिकल खोजने के लिए 15 प्रैक्टिकल करने में सक्षम।

– लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मैपिंग कर सबसे छोटा व बाधारहित रूट बताएगा।

आइआइटी के ग्रीन जेल से उड़ेगा गगनयान

आइआइटी का एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान-2022 के लिए ग्रीन जेल ईंधन भी बना चुका है। इससे अंतरिक्ष यान दोगुनी रफ्तार से उड़ेगा और मौजूदा ईंधन की तुलना में 40 फीसद कम प्रदूषण करेगा। यह जेल एयरोस्पेस के प्रो. डीपी मिश्रा व उनकी टीम ने दो साल में तैयार किया है। स्पेस शटल पर अधिक दबाव के बावजूद जेल-ईंधन इंजन का तापमान साम्य अवस्था में रखेगा।

इनका ये है कहना

भारत में पहली बार लूनर रोवर सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इससे हम उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गए हैं, जिनके पास यह तकनीक है।

-प्रो. आशीष दत्ता, मैकेनिकल इंजीनियङ्क्षरग विभाग आइआइटी कानपुर