हिंद महासागर की सुरक्षा को लेकर दो दिवसीय बैठक में 29 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने और दुनिया के देशों के साथ समुद्री सूचना को साझा करने के लिए भारतीय नौसेना ने गुरुग्राम स्थित नौसेना के ‘इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर फॉर इंडियन ओशन रीजन’ (आईएफसी-आईओआर) में दो दिनों का समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला (एमआईएसडब्ल्यू) का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में (आईओआर) हिंद महासागर क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन उभर रही समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए लगभग 29 देशों के 41 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेने भारत पहुंचे हैं।

भारतीय नौसेना की दुनिया के देशों के साथ हो रही इस बैठक में समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, मानवीय सहायता और आपदा राहत, मानव और मादक पदार्थो की तस्करी तथा इन चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी पहलुओं के बारे में विचार विमर्श किया गया है। जहां सभी देशों ने अपनी-अपनी बात सामने रखी है। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में सूचना साझा करने का अभ्यास भी आयोजित किया गया है।

दो दिन चलने वाले वर्कशॉप के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच सूचना तंत्र को और बेहतर बनाने पर बल दिया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि सूचनाओं के त्वरित रूप से कैसे एक दूसरे से साझा किया जाए।

नौसेना ने बताया कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में समुद्र की रक्षा, विश्व व्यापार और अनेक देशों की आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। समुद्र में गतिविधियों का पैमाना, क्षेत्र और बहुराष्ट्रीय स्वरूप समुद्री सुरक्षा के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण की जरूरत दर्शाता है।

सूचना संलयन केंद्र- हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) का दिसंबर, 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ने उद्घाटन किया था। ऐसा इस क्षेत्र में समुद्री रक्षा और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए किया गया है।

अब तक यह केंद्र 16 से अधिक देशों और 13 अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के साथ संबंध स्थापित कर चुका है। सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से हिंद महासागर का विशेष महत्व है।