फटा पाइप और खराब सीढ़ी के साथ असहाय दिखे दमकल कर्मी, नहीं तो बच जाती सबकी जान

 संसाधन विहीन का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है जब अग्निशमन विभाग के अधिकारी डबुआ कॉलोनी स्थित इमारत में लगी आग बुझाने फटे हुए पाइप के साथ पहुंचे। इतना ही नहीं जब बारी प्रथम तल पर चढ़ने की आई, तो सीढ़ी काफी देर तक खुली ही नहीं। दरअसल फरीदाबाद कहने को तो स्मार्ट सिटी की सूची में है, पर यहां दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) के पास आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

विभाग के पास नहीं हैं जरूरी इंतजाम
अहम बात यह भी है कि ग्रेटर फरीदाबाद, सूरजकुंड, बल्लभगढ़ सहित अन्य शहर के क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं, पर यदि यहां आगजनी हो जाए तो विभाग के पास एक भी हाईड्रोलिक मशीन नहीं है।  डबुआ कॉलोनी में 33 फुट रोड पर लगी आग के दौरान मौजूद लोगों ने स्पष्ट कहा कि अगर फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त संसाधन होते तो शायद तीन जिंदगियां बच जातीं।

पाइप फटा होने से प्रेशर से नहीं जा रहा था पानी
आग के दौरान मौजूद रहे चिराग कुमार ने बताया कि सूचना देने के करीब 15 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी मौके पर पहुंच गई, तब उसमें केवल दो कर्मचारी थे। उसका पाइप फटा हुआ था, ऐसे में पानी पूरे प्रेशर के साथ प्रथम फ्लोर तक नहीं पहुंच पाया। वहां मौजूद लोगों ने फटे हुए पाइप पर पैर रखा, तब पानी ऊपर तक पहुंचा।

सीढ़ी ने भी नहीं दिया साथ
फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर मौजूद सीढ़ी भी पूरी नहीं खुली और दूसरे फ्लोर तक नहीं पहुंच पाई। तब लोग मकान में पीछे से सीढ़ी लगाकर अंदर दाखिल हुए। कर्मियों के पास ऐसा कोई मास्क या कपड़ा नहीं था, जिन्हें पहनकर तुरंत ऊपरी फ्लोर तक पहुंच सकें। अगर यह सब होता तो नीता व बच्चों को बाहर निकालने में देर नहीं होती। तब शायद उनकी जान बच जाती।

काफी देर बाद आग पर पाया काबू
फायर ब्रिगेड कर्मी भी वहां सामान्य लोगों की तरह ही बर्ताव करते नजर आए। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों ने करीब पौने घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग भूतल तक ही सीमित रही। विभाग के पास शहर से लेकर गांव के लिए केवल 16 गाड़ियां हैं। इनके लिए कर्मचारियों के स्टाॅफ की भी कमी है जबकि 200 कर्मचारियों की जरूरत है।

पुराने हो चुके हैं संसाधन
अग्निरोधक सूट काफी पुराने हो चुके हैं। स्माक मास्क दस्ताने भी कर्मचारियों की तुलना में कम है। हाईड्रोलिक मशीन नहीं है। स्टाफ व संसाधन की कमी तो है, पर हम पूरी कोशिश करते हैं कि इसकी वजह से कहीं परेशानी न हो। संसाधन व स्टाफ की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है।