गाजियाबाद में हिंदी भवन पर GDA ने लिया कब्जा, सभागार से लेकर मुख्य गेट तक जड़ा ताला

जीडीए ने 13 साल बाद लोहियानगर स्थित हिंदी भवन पर सोमवार को कब्जा ले लिया। सभागार से लेकर मुख्य गेट तक अपना ताला जड़ दिया। पिछले ही महीने जीडीए ने इस संबंध में हिंदी भवन समिति को नोटिस दे दिया था। भुगतान न होने और भूखंड आवंटन की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर वर्ष 2006 में भवन की भूमि का आवंटन निरस्त किया गया था। लेकिन, जीडीए ने कब्जा नहीं लिया तो भवन का संचालन होता रहा। वार्ड-84 के पार्षद राजेंद्र त्यागी द्वारा मुख्यमंत्री को शिकायत करने पर जीडीए ने कार्रवाई की है।

लोहियानगर सेक्टर-आठ में हिंदी भवन बनाने के लिए 24 मार्च 1986 को जीडीए से 3838.0148 वर्ग मीटर भूमि रियायती दरों पर आवंटित की गई थी। उस वक्त जमीन की कीमत तीन लाख 37 हजार 747 रुपये 70 पैसे तय हुई थी। समिति ने महज 60 हजार रुपये जमा किए थे। बाकी भुगतान नहीं किया। आवंटन के वक्त शर्त रखी गई थी कि समिति हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए कार्य करेगी।

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। सदस्यों की संख्या 85 से ज्यादा नहीं होगी। समिति की नियमावली में आजीवन सदस्य बनाने के लिए 11 हजार और सदस्य बनाने के लिए 101 रुपये शुल्क निर्धारित हुआ था। इन शर्तों और नियमावली का उल्लंघन होने पर जीडीए ने वर्ष 2006 भवन के लिए भूमि आवंटन को निरस्त कर दिया था। उस वक्त मूल और ब्याज मिलाकर 36 लाख रुपये बकाया था।

जीडीए की इस कार्रवाई के खिलाफ समिति हाईकोर्ट गई थी। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने समिति की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद जीडीए ने हिंदी भवन का कब्जा नहीं लिया। जीडीए अधिकारियों की अनदेखी का फायदा समिति उठाती रही। अब तक इसका संचालन हो रहा था। इसके खिलाफ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। उसमें पूरा प्रकरण बताते हुए हिंदी भवन का कब्जा वापस लेने और समिति से किराया वसूलने की मांग की थी।