भोपाल:  मध्यप्रदेश वन विभाग एवं  mponline limited   द्वारा साइबर सेल में शिकायत की गई थी, कि किसी व्यक्ति द्वारा वन विभाग की असली वेवसाईट  forest.mponline.gov.in से मिलती-जुलती नाम की   website- safari-mp.online   बनाकर वेवसाईट में content  की हूबहू नकल कर पर्यटकों को प्रदेश के टाइगर रिसर्वों के अंदर भ्रमण हेतु आवष्यक परमिट प्रदान करने का झूठा आष्वासन देकर पैसे ऐठ रहा है। जबकि टाइगर रिसर्वों में भ्रमण हेतु आवश्यक परमिट केवल वन विभाग की ऑफिसियल साईट द्वारा ही ऑनलाइन बुक किये जा सकते है।

उपरोक्त शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस भोपाल द्वारा तत्काल कार्यवाही कर वेवसाईट का संचालन करने वाल व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता तथा सूचना एवं प्रोद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर अनुसंधान में लिया गया । प्राप्त जानकारी के आधार पर वेवसाईट छत्तीसगढ से संचालित होना पाये जाने से साइबर क्राइम पुलिस की एक टीम तत्काल ‘‘बिलासपुर’’छ0ग0 रवाना की गई । अनुसंधान में पाया गया कि आषुतोश देवांगन नामक युवक जो कि वेवसाईट तथा एप डेवलपमेन्ट का कार्य सिम्पेक्ट टेक्नालॉजी के नाम से अपनी कम्पनी रजिस्टर्ड कर पुरानी हाईकोर्ट बिलासपुर के पास अपना व्यवसाय संचालित करता था। उक्त व्यक्ति द्वारा साइबर पुलिस को पूछताछ में बताया कि शैलेश सावंरिया नामक व्यवसायी के कहने पर वन विभाग की रजिस्टर्ड वेवसाईट forest.mponline.gov.in   कॉपी कर उक्त  safari-mp.online    वेवसाईट बनाना स्वीकार किया ।

वेवसाइट का संचालन शैलेष सावंरिया नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था । वन विभाग की अधिकृत वेवसाइट osolkbV forest.mponline.gov.in  के समान ही दोनो आरोपियों द्वारा वनविभाग कि रजिस्टर्ड वेवसाइट की कॉपी कर फर्जी वेवसाइट  safari-mp.online   हूबहू बनाकर पर्यटकों से उस वेवसाइट पर गोपनीय जानकारी लेकर फार्म भराया जाता था, तथा पर्यटकों का विवरण तथा उनकी संवेदनषील व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने के पष्चात् उन्हें एक मोबाइल नंबर पर सुनील यादव नामक काल्पनिक व्यक्ति से बात करने के लिये मैसेज भेजा जाता था। जब पर्यटक दिये गए नंबर पर कॉल करते थे, तब उनसे शैलेष सावंरिया ही सुनील यादव बनकर बात करता था, तथा पर्यटकों को गुमराह करते हुए उनसे अपने बैंक एकाउन्ट में पैसे जमा करवाता था ।

साइबर क्राइम पुलिस भोपाल द्वारा आरोपी शैलेष सावंरिया के बैंक एकाउन्ट फ्रीज कराकर नकली वेवसाइट बनाने वाले आरोपी आशुतोष देवांगन तथा संचालित करने में प्रयुक्त कम्प्यूटर जप्त कर एवं उन्हें गिरफतार कर भोपाल लाया गया ।

आरोपियों की विस्तृत जानकारी :-
1. आशुतोष देवांगन जो कि एप डेवलपमेन्ट का कार्य सिम्पेक्ट टेक्नालॉजी के नाम से अपनी रजिस्टर्ड कम्पनी कर पुरानी हाईकोर्ट , बिलासपुर के पास अपना व्यवसाय संचालित करता था।
2. शैलेश सावंरिया निवासी छत्तीसगढ नामक व्यक्ति द्वारा वेवसाइट डेवलपर्र से फर्जी साईट बनवाकर पयटकों से पैस ऐठने का कार्य किया जा रहा था।

 

आरोपी की विस्तृत जानकारी
टीप :- इन्टरनेट पर अनेक व्यक्तियों द्वारा सरकारी सस्थाओं तथा विभागों के नाम से मिलते-जुलते नामों की हूबहु फर्जी वेवसाइट बनाकर लोगों को ठगने का प्रयास किया जाता है, आम नागरिकों को ठगों से बचने के लिए सावधानी रखते हुए असली नकली में फर्क समझने की आवष्यकता है ताकि होने वाली ठगी से बचा जा सके ।