बंगाल में एक दिन पहले प्रचार बंद करने का आदेश

  • कांग्रेस का आरोप- चुनाव आयोग का बंगाल में एक दिन पहले प्रचार खत्म करने का फैसला उसकी कमजोरी को दिखाता है
  • ‘चुनाव आयोग मोदी और शाह के अंतर्गत एक मोहरा बनकर रह गया है’
  • ‘प्रचार गुरुवार रात से इसलिए बंद किया गया ताकि वहां मोदी की 2 रैलियां हो सकें’

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल ने गुरुवार रात 10 बजे से बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार (ईसी) पर रोक लगा दी। सामान्य रूप से यह प्रचार शुक्रवार को बंद होता। इस पर कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग का यह फैसला उसकी कमजोरी दिखाता है। देश में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आदर्श आचार संहिता) की जगह मोदी कोड ऑफ मिसकंडक्ट लागू है।

आयोग ने बुधवार को कहा कि हिंसा की घटनाओं से हमें काफी दुख है। हमने पहली बार इस तरह से धारा 324 का इस्तेमाल किया है, लेकिन भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हुईं तो हम फिर कदम उठाएंगे। आयोग ने सीआईडी के एडीजी, गृह विभाग के प्रधान सचिव को भी हटाने का आदेश दिया था। मंगलवार रात कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान हिंसा भड़की थी। पत्थरबाजी और आगजनी हुई थी। ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी गई। हिंसा के लिए भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने एक-दूसरे को जिम्मेदार बताया।

‘चुनाव आयोग का भाजपा को तोहफा’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘‘बंगाल में चुनाव प्रचार 16 तारीख की रात से रोक दिया जाएगा। यह चुनाव आयोग का भाजपा को तोहफा लगता है। यह चुनाव आयोग की कमजोरी दिखाता है कि वह स्वतंत्र और साफ चुनाव नहीं करा सकता। क्या ईसी सिर्फ मोदी-शाह के अंतर्गत एक मोहरा बनकर रह गया है। ईसी को अब लोगों के सामने आना चाहिए और अपने काम के बारे में बताना चाहिए।’’

सुरजेवाला ने यह भी कहा, ‘‘क्या ईसी ने आज रात से प्रचार इसी लिए बंद किया, ताकि मोदी की दो रैलियां बंगाल में हो सकें। मोदी और शाह की तरफ से आचार संहिता तोड़ने के बारे में चुनाव आयोग को करीब 11 शिकायतें की गईं, वह भी सबूतों के साथ, लेकिन चुनाव आयोग ने मोदी-शाह के सामने सरेंडर करते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। अब मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, मोदी कोड ऑफ मिसकंडक्ट बन चुका है। क्यों मोदी टीवी को बैन नहीं किया गया।’’

भाजपा-तृणमूल के आरोप-प्रत्यारोप
बुधवार को शाह ने भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने कहा कि हम शांति से रोड शो निकाल रहे थे, लेकिन तीन हमले हुए। अगर सीआरपीएफ न होती तो मेरा बचकर आना नामुमकिन था। दीदी से अपील करता हूं कि अगर कुछ छिपाना नहीं है, तो किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराएं। उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार शाम पैदल मार्च निकाला।

तृणमूल ने भाजपा पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- शाह बंगाल में बाहर से गुंडे लेकर आए थे। छात्रों ने शाह को पोस्टर और काले झंडे दिखाए थे। यह लोकतांत्रिक विरोध था। भाजपा वालों ने ही पत्थर फेंके। ये कोलकाता विश्वविद्यालय के छात्र थे, यहां से ईश्वरचंद्र विद्यासागर और श्यामा चरण मुखर्जी जैसी हस्तियों का नाम जुड़ा है।

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