जकरबर्ग ने 20 साल की उम्र में फेसबुक की शुरुआत की

मार्क जकरबर्ग आज 35 साल के हो गए। जकरबर्ग की नेटवर्थ 4.9 लाख करोड़ रुपए है और वे दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। जकरबर्ग ने 20 साल की उम्र में फेसबुक की शुरुआत की थी, लेकिन यह उनका पहला एक्सपेरिमेंट नहीं था। इससे पहले वे 12 साल की उम्र में पिता के क्लिनिक के लिए मैसेजिंग प्रोग्राम और 16 साल की उम्र में हाईस्कूल के प्रोजेक्ट के तौर पर म्यूजिक ऐप बना चुके थे। हाईस्कूल में ही उन्हें कई कंपनियों ने ऐप खरीदने और जॉब के ऑफर दिए, लेकिन जकरबर्ग ने उन्हें ठुकरा दिया। आज वे 38 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली फेसबुक के सीईओ और चेयरमैन हैं।

पेशेंट क्लिनिक पर आता था तो रिसेप्शनिस्ट मैसेजिंग प्रोग्राम इस्तेमाल करती थी
जकरबर्ग ने 12 साल की उम्र में इंस्टैंट मैसेजिंग प्रोग्राम बनाया था। इसे वे जकनेट कहते थे। उनके डेंटिस्ट पिता इसका उपयोग अपने क्लिनिक पर करते थे। जब भी कोई पेशेंट क्लिनिक पर आता था, तो रिसेप्शनिस्ट आवाज लगाने की बजाय इस मैसेजिंग प्रोग्राम से डॉक्टर को सूचना देती थी। जकरबर्ग के घर में भी कम्युनिकेशन के लिए यह मैसेजिंग प्रोग्राम इस्तेमाल होता था। स्कूल टाइम में वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर वीडियो गेम भी बनाया करते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया भी था कि मेरे कुछ दोस्त आर्टिस्ट थे। वे डिजाइन बनाते थे और मुझे उस पर गेम बनाना होता था। यह हम अपने मजे के लिए करते थे।

हाईस्कूल में ही माइक्रोसॉफ्ट से जॉब ऑफर आया था
जकरबर्ग ने न्यू हैम्पशायर स्थित फिलिप्स एक्जेटर एकेडमी में हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान साल 2000 में अपने दोस्तों के साथ एक म्यूजिक ऐप ‘सिनाप्स मीडिया प्लेयर’ बनाया था। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ऐप था। यह यूजर की पंसद के हिसाब से एमपी3 प्ले लिस्ट बनाता था। माइक्रोसॉफ्ट और एओएल जैसी बड़ी कंपनियों ने उन्हें इसके बदले 10 लाख डॉलर ऑफर किए थे। दोनों ही कंपनियां उन्हें हायर भी करना चाहती थीं, लेकिन जकरबर्ग ने नौकरी की जगह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को तरजीह दी। हाईस्कूल के दौरान ही उन्होंने कई कंपनियों के जॉब ऑफर ठुकराए थे।

फेसबुक से पहले ‘फेसमैश’ और ‘कोर्समैच’
जकरबर्ग ने हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान फेसबुक से पहले एक प्रोग्राम ‘फेसमैश’ बनाया था, जो यह खोजने में मदद करता था कि कैंपस में सबसे आकर्षक लड़के, लड़कियां कौन हैं? इसमें यूजर्स छात्र-छात्राओं के फोटोज़ की तुलना कर बताते थे कि उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा कौन लगता है। बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे बंद करा दिया था। अपने इस प्रोग्राम के चलते जकरबर्ग पर यूनिवर्सिटी से बाहर होने तक की नौबत तक आ गई थी। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने ‘कोर्समैच’ प्रोग्राम भी बनाया था। इसमें यूजर्स यह बताते थे कि वे कौन-कौन सी क्लास अटेंड कर रहे हैं ताकि दूसरे छात्र अपने इंटरेस्ट के साथ कोर्स और क्लासेस का सिलेक्शन कर सकें।